नई दिल्ली: राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा को प्रभावित करने वाले एक बेहद संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय साजिश का पर्दाफाश किया है। इस मामले में एनआईए ने कोलकाता, लखनऊ और दिल्ली के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों से सात विदेशी नागरिकों को हिरासत में लिया है, जो म्यांमार के सशस्त्र गुटों को आधुनिक ड्रोन तकनीक और युद्ध कौशल का प्रशिक्षण दे रहे थे। पकड़े गए आरोपियों में एक अमेरिकी और छह यूक्रेनी नागरिक शामिल हैं, जो कुआलालंपुर भागने की फिराक में थे। दिल्ली की एक अदालत ने सभी आरोपियों को 27 मार्च 2026 तक एनआईए की हिरासत में भेज दिया है।
राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा
यह मामला 13 मार्च 2026 को गृह मंत्रालय के निर्देश पर गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत दर्ज किया गया था। जांच में सामने आया है कि करीब 14 यूक्रेनी नागरिक टूरिस्ट वीजा पर भारत आए और बिना किसी वैध परमिट के पूर्वोत्तर राज्यों गुवाहाटी और मिजोरम के रास्ते अवैध रूप से म्यांमार के चिन स्टेट में दाखिल हुए। वहां उन्होंने एथनिक आर्म्ड ग्रुप्स को ड्रोन असेंबली, एरियल सर्विलांस, इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग और कॉम्बैट तकनीक जैसी घातक युद्ध कलाओं की ट्रेनिंग दी। एनआईए के मुताबिक, ये समूह भारत के प्रतिबंधित विद्रोही गुटों से भी जुड़े हो सकते हैं, जिससे पूर्वोत्तर भारत की स्थिरता को बड़ा खतरा पैदा हो गया था।
यूक्रेन की नाराजगी और रूस का एंगल
भारत में अपने नागरिकों की गिरफ्तारी पर यूक्रेन के दूतावास ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। यूक्रेन ने इन गिरफ्तारियों को ‘राजनीतिक रूप से प्रेरित’ और ‘सुनियोजित’ होने की आशंका जताई है। यूक्रेन का कहना है कि यह कार्रवाई रूस द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर की गई हो सकती है, जिसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच अविश्वास पैदा करना है। यूक्रेन ने आतंकवाद के किसी भी आरोप को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि वह खुद रूसी आतंक का शिकार है और भारत के साथ अपने मजबूत रिश्तों का हवाला देते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। हालांकि, अमेरिकी प्रशासन ने इस मामले पर जानकारी होने की बात तो स्वीकार की है, लेकिन गोपनीयता का हवाला देते हुए फिलहाल कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है।
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