केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर जारी आंदोलन के बीच जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अपना अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल समाप्त कर दी है। अनशन खत्म करने के बाद जारी 11 मिनट के वीडियो संदेश में वांगचुक ने कहा कि सरकार ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर कोई तत्काल आश्वासन नहीं दिया है। उनका कहना है कि यदि इस्तीफा नहीं होता है, तो इससे सरकार का ही नुकसान होगा।
वांगचुक ने बताया कि अनशन जारी रखने या उसे समाप्त करने के बीच उन्हें फैसला लेना था। उन्होंने कहा कि आंदोलन के जरिए कई महत्वपूर्ण बातें हासिल हुई हैं और यदि शिक्षा मंत्री इस्तीफा नहीं देते हैं, तो इसका नुकसान छात्रों या आंदोलन को नहीं, बल्कि सरकार को होगा। उन्होंने कहा कि यदि सरकार पहले ही यह कदम उठा लेती, तो उसका नुकसान रुक सकता था।
उन्होंने यह भी कहा कि उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा आंदोलन में शामिल छात्रों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई रोकना था। उनके अनुसार, यह सुनिश्चित करना जरूरी था कि प्रदर्शन कर रहे युवाओं पर कोई मुकदमा दर्ज न हो।
वांगचुक ने बताया कि केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा, जितेंद्र सिंह और लेह-लद्दाख एपेक्स बॉडी के नेताओं की मौजूदगी में उन्होंने 26 दिनों बाद अपना अनशन समाप्त किया। उन्होंने कहा कि विभिन्न शर्तों पर लंबी और गंभीर बातचीत तथा देश में संभावित हिंसा की स्थिति को देखते हुए यह फैसला लिया गया।
इस बीच केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री की ओर से कहा गया कि सरकार पहले ही संसद में प्रश्नपत्र लीक और परीक्षा प्रणाली में सुधार पर चर्चा कराने का आश्वासन दे चुकी है। साथ ही हाल के नीट प्रश्नपत्र लीक मामलों से जुड़े आत्महत्या पीड़ितों के परिजनों को उचित मुआवजा देने के प्रस्ताव पर भी सरकार सकारात्मक रूप से विचार कर रही है।
उधर, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने सोनम वांगचुक के अनशन समाप्त करने का स्वागत किया है। हालांकि पार्टी ने स्पष्ट किया है कि जंतर-मंतर पर जारी विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा। साथ ही शुक्रवार को CJP के प्रतिनिधियों और सरकार के मंत्रियों के बीच बैठक प्रस्तावित है। माना जा रहा है कि यह बैठक दोपहर करीब 12:30 बजे हो सकती है, जिसमें आंदोलन से जुड़ी प्रमुख मांगों पर चर्चा की जाएगी।
