Nagpur NGO Case: नागपुर के उत्तर-पश्चिम इलाके में गरीब बच्चों की शिक्षा के लिए काम करने वाला एक गैर-सरकारी संगठन (NGO) उस समय विवादों के घेरे में आ गया, जब इसके अध्यक्ष रियाज फाजिल काजी पर यौन उत्पीड़न, साइबर स्टॉकिंग और धार्मिक दबाव बनाने के गंभीर आरोप लगे। शनिवार रात मानकापुर पुलिस स्टेशन में दर्ज कराई गई एफआईआर के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। रविवार को कोर्ट में पेशी के बाद रियाज काजी को 23 अप्रैल तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है।
यह मामला तब और गंभीर हो गया जब इसमें खुफिया एजेंसियों और महाराष्ट्र के आतंकवाद निरोधक दस्ते (ATS) की एंट्री हुई। पुलिस सूत्रों के अनुसार, एटीएस अब इस एनजीओ के वित्तीय लेन-देन, इसके वास्तविक उद्देश्यों और बाहरी संपर्कों की समानांतर जांच कर रही है। यह मामला हाल ही में नासिक टीसीएस यूनिट और अमरावती के परतवाड़ा में सामने आए यौन शोषण और धार्मिक उत्पीड़न के मामलों से काफी मिलता-जुलता है, जिससे सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड पर हैं।
इस मामले की मुख्य शिकायतकर्ता एक 23 साल की युवती है, जो इस एनजीओ में प्रशासन और एचआर हेड के पद पर तैनात थी। पीड़िता ने आरोप लगाया कि जुलाई 2024 में उसके जन्मदिन के अवसर पर आरोपी ने उसे अपने केबिन में बुलाकर जबरन गले लगाया और माथे पर चूमा। पीड़िता के अनुसार, नौकरी जाने के डर से उसने शुरुआत में विरोध नहीं किया, लेकिन आरोपी की हरकतें समय के साथ बढ़ती गईं। एक घटना में आरोपी ने कथित तौर पर सीसीटीवी (CCTV) का प्लग निकालने के बाद पीड़िता को गले लगाने की कोशिश की। जब पीड़िता ने विरोध करना शुरू किया, तो आरोपी ने उसके साथ दुर्व्यवहार और बदतमीजी शुरू कर दी।
आरोपी पर साइबर स्टॉकिंग और चरित्र हनन के भी संगीन आरोप लगे हैं। एफआईआर के मुताबिक, रियाज काजी ने महिला कर्मचारियों और वॉलंटियर्स की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए एक फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट बनाया था। इसके अलावा, 13 अप्रैल को आरोपी ने एक पूर्व कर्मचारी की मां को फोन कर मुख्य शिकायतकर्ता और उसकी बहन के बारे में बेहद आपत्तिजनक और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया, जिसमें उन्हें “कॉल गर्ल” तक कहा गया।
धार्मिक उत्पीड़न का पहलू भी इस मामले में प्रमुखता से उभरा है। शिकायतकर्ता की बड़ी बहन, जो नवंबर 2025 में यहां प्रोजेक्ट मैनेजर बनी थी, ने आरोप लगाया कि उसे फील्ड विजिट के दौरान एक खास धर्म की प्रार्थनाएं करने और पूरे शरीर को ढंकने वाले विशेष कपड़े पहनने के लिए मजबूर किया जाता था। आरोपी ने अन्य कर्मचारियों पर भी उनके धर्म के विपरीत रीति-रिवाजों को थोपने की कोशिश की, जिसके कारण कई महिला शिक्षकों ने पहले ही नौकरी छोड़ दी थी। फिलहाल मानकापुर पुलिस सीसीटीवी फुटेज, कॉल रिकॉर्ड्स और ऑडियो क्लिप्स के जरिए साक्ष्य जुटा रही है और अन्य पीड़ितों से भी संपर्क करने की कोशिश कर रही है।
