JPSC-JSSC Protest: रांची में छात्रों का विधानसभा मार्च, स्ट्रेचर पर पहुंचे अनशनकारी देवेंद्र नाथ महतो

Ranchi Student Protest: JPSC और JSSC परीक्षा में गड़बड़ी के विरोध में रांची में हजारों छात्रों ने विधानसभा मार्च निकाला। पिछले 9 दिनों से अनशन पर बैठे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो जान जोखिम में डालकर एंबुलेंस और स्ट्रेचर के सहारे प्रदर्शन में शामिल हुए।

रांची: दिल्ली के बाद अब झारखंड की राजधानी रांची में भी छात्रों का आंदोलन तेज हो गया है। सोमवार को जेपीएससी-जेएसएससी परीक्षा में गड़बड़ी के विरोध में हजारों छात्रों ने पुराने विधानसभा परिसर से नई विधानसभा की ओर मार्च किया। इस प्रदर्शन में पिछले 9 दिनों से अनशन कर रहे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो भी शामिल हुए। उनकी हालत ऐसी थी कि उन्हें एंबुलेंस और स्ट्रेचर के सहारे मार्च में आगे ले जाया गया।

छात्रों के विधानसभा मार्च को रोकने के लिए पुलिस ने कई जगहों पर बैरिकेडिंग की थी। पुराने विधानसभा के पास से आगे बढ़ते हुए प्रदर्शनकारियों ने एक के बाद एक कई बैरिकेड पार कर लिए। इसके बाद छात्र शहीद मैदान के पास सड़क पर बैठ गए। पुलिस की ओर से छात्रों को आगे जाने से रोकने के दौरान धक्का-मुक्की की स्थिति भी बनी। हालांकि, छात्र संगठनों के वोलेंटियर लगातार भीड़ को संभालने और प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित रखने की कोशिश करते रहे।

एंबुलेंस से निकले देवेंद्र नाथ महतो, फिर स्ट्रेचर पर हुआ मार्च

देवेंद्र नाथ महतो पिछले 9 दिनों से अनशन पर हैं। आंदोलन के शुरुआती चार दिनों में उन्होंने पानी भी नहीं लिया था। इसके बावजूद उन्होंने विधानसभा मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों का साथ नहीं छोड़ा। हाथ में शिबू सोरेन की तस्वीर लेकर महतो मंच से मार्च के लिए निकले। कुछ कदम पैदल चलने के बाद उन्हें एंबुलेंस में बैठाया गया।

कुछ दूरी तक एंबुलेंस से जाने के बाद आंदोलनकारियों ने स्ट्रेचर को अपने कंधों पर उठा लिया और देवेंद्र नाथ महतो को लेकर आगे बढ़े। उनकी हालत और आंदोलन में शामिल होने के जज्बे को देखकर प्रदर्शनकारियों में उत्साह बढ़ गया। छात्रों ने उनके समर्थन में जमकर नारेबाजी की।

‘अनशन से ज्यादा कष्ट कांटेदार तार देखकर हुआ’

मार्च के दौरान मीडिया से बातचीत में देवेंद्र नाथ महतो ने कहा कि उन्हें अनशन से ज्यादा तकलीफ पुलिस की ओर से लगाए गए कंटीले तारों को देखकर हुई। उन्होंने कहा कि सरकार ने अराजकता को न्योता दिया है और वह ऐसी स्थिति में हैं कि अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत पड़ सकती है।

महतो ने कहा कि वह एक सामान्य व्यक्ति हैं और माड़-भात तथा सूखी रोटी खाते हैं। उनके मुताबिक, निजी जिंदगी में उनके लिए कुछ बदलने वाला नहीं है, लेकिन छात्रों के आंदोलन को जिस तरह रोका जा रहा है, उससे उन्हें ज्यादा दुख हो रहा है। उन्होंने कहा कि तीन लेयर की बैरिकेडिंग टूट चुकी है और सरकार को सोचना चाहिए कि आखिर वह अराजकता क्यों चाहती है।

उन्होंने छात्रों और मीडिया का धन्यवाद करते हुए आंदोलनकारियों से संयम और अनुशासन बनाए रखने की अपील भी की। महतो ने कहा कि वह नहीं चाहते कि ऐसी स्थिति बने जिससे छात्रों को चोट पहुंचे या आंदोलन उग्र हो जाए।

‘जान जोखिम में डालकर मार्च में शामिल हुआ हूं’

देवेंद्र नाथ महतो ने कहा कि उन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर विधानसभा मार्च में हिस्सा लिया है। उनके मुताबिक, आंदोलन कभी भी उग्र हो सकता है, भगदड़ मच सकती है या पुलिस की ओर से आंसू गैस के गोले दागे जा सकते हैं। ऐसी स्थिति में वह अपनी हालत के कारण भाग नहीं पाएंगे।

उन्होंने कहा कि अगर शिबू सोरेन जीवित होते तो वह भी आंदोलनकारी छात्रों के साथ खड़े होते, क्योंकि उन्होंने खुद जिंदगीभर आंदोलनों में हिस्सा लिया है।

संसद मार्च में शामिल नहीं हो पाए थे अभिजीत दीपके

रांची के आंदोलन के बीच दिल्ली में हुए कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन का भी जिक्र सामने आया। 20 मार्च को दिल्ली के जंतर-मंतर से संसद मार्च का आयोजन किया गया था, लेकिन पार्टी प्रमुख अभिजीत दीपके खुद मार्च की अगुआई नहीं कर पाए थे और जंतर-मंतर पर ही एक ट्रक पर मौजूद रहे थे। इसे लेकर उनकी आलोचना भी हुई थी।

हाल ही में एक इंटरव्यू में दीपके ने बताया था कि वह उस समय तीन दिन से अनशन पर थे और उन्हें चक्कर आ गया था। पार्टी के अन्य साथियों के कहने पर वह ट्रक पर सवार हुए थे, ताकि वहां से भीड़ को गाइड कर सकें। उन्होंने कहा था कि अगर वह अनशन पर नहीं होते तो खुद जमीन पर उतरकर संसद मार्च में शामिल होते।

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