Operation Sindoor: किराना हिल्स पर नहीं हुआ था हमला! पूर्व CDS अनिल चौहान ने बताया सरगोधा में क्या हुआ था

पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन के एक कार्यक्रम में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान पाकिस्तान के सरगोधा एयरबेस के पास किराना हिल्स में हुई घटना पर अहम जानकारी साझा की।

पूर्व CDS अनिल चौहान ने Operation Sindoor की घटना पर किया खुलासा
पूर्व CDS अनिल चौहान ने Operation Sindoor की घटना पर किया खुलासा

नई दिल्ली: ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के सरगोधा एयरबेस के आसपास हुई एक घटना को लेकर अब पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने अहम जानकारी साझा की है। उनके मुताबिक, भारतीय सेना ने सरगोधा क्षेत्र में पाकिस्तानी रडार सिस्टम की तलाश के लिए कई लोइटरिंग म्यूनिशन भेजे थे। इनमें से एक करीब दो घंटे तक आसमान में घूमता रहा और ईंधन खत्म होने के बाद किराना हिल्स के एक हिस्से से टकरा गया।

यह जानकारी ऑपरेशन सिंदूर के करीब एक साल बाद विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान सामने आई। किराना हिल्स सरगोधा से लगभग 10 किलोमीटर उत्तर में स्थित है। उस समय पाकिस्तानी मीडिया में यहां से धुआं उठने की तस्वीरें सामने आई थीं, जिसके बाद यह चर्चा शुरू हो गई थी कि भारत ने शायद इस इलाके को निशाना बनाया है।

किराना हिल्स को निशाना बनाने की बात से इनकार

जनरल अनिल चौहान ने स्पष्ट किया कि भारतीय सेना ने किराना हिल्स को किसी विशेष लक्ष्य के तौर पर निशाना नहीं बनाया था। उनका कहना था कि सरगोधा के आसपास भेजे गए लोइटरिंग म्यूनिशन का मकसद रडार सिस्टम का पता लगाना था।

उन्होंने पूर्व एयर मार्शल एके भारती के उस बयान का भी समर्थन किया, जिसमें मई 2025 में कहा गया था कि भारत ने किराना हिल्स पर हमला नहीं किया था। उनके मुताबिक, उस समय भारतीय पक्ष को वहां किसी परमाणु सुविधा के बारे में भी जानकारी नहीं थी।

दो घंटे बाद खत्म हुआ ईंधन

लोइटरिंग म्यूनिशन को इस तरह डिजाइन किया जाता है कि वह किसी इलाके में कुछ समय तक उड़ान भरते हुए लक्ष्य की तलाश कर सके। जनरल चौहान के मुताबिक, ऐसे हथियार की उड़ान अवधि सीमित होती है। यदि तय समय के भीतर उसे कोई रडार या दूसरा लक्ष्य नहीं मिलता, तो ईंधन खत्म होने के बाद वह नीचे गिर सकता है।

किराना हिल्स के मामले में भी ऐसा ही हुआ। एक लोइटरिंग म्यूनिशन लगभग दो घंटे तक क्षेत्र में घूमने के बाद ईंधन खत्म होने पर पहाड़ी से जा टकराया। इसी घटना के कारण वहां धुआं दिखाई दिया और बाद में इसे लेकर अलग-अलग तरह की अटकलें लगाई गईं।

किराना हिल्स को लेकर क्यों हुई थी चर्चा?

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में सरगोधा के पास मौजूद किराना हिल्स लंबे समय से संवेदनशील सैन्य और परमाणु सुविधाओं से जोड़ी जाती रही हैं। इसी वजह से ऑपरेशन सिंदूर के दौरान वहां से धुआं दिखाई देने के बाद यह अनुमान लगाया जाने लगा कि भारतीय हमले में किसी परमाणु प्रतिष्ठान को निशाना बनाया गया होगा।

हालांकि, भारतीय पक्ष की ओर से लगातार इस बात से इनकार किया गया कि किराना हिल्स को जानबूझकर हमले का लक्ष्य बनाया गया था। जनरल चौहान की जानकारी से भी यही संकेत मिलता है कि वहां हुई घटना किसी निर्धारित लक्ष्य पर किए गए हमले का हिस्सा नहीं थी।

क्या होता है लोइटरिंग म्यूनिशन?

लोइटरिंग म्यूनिशन को सामान्य तौर पर ऐसे हथियार के रूप में समझा जा सकता है, जो ड्रोन और मिसाइल की कुछ विशेषताओं को एक साथ इस्तेमाल करता है। इसे हवा में भेजने के बाद यह किसी निर्धारित इलाके में घूमकर लक्ष्य की तलाश कर सकता है। लक्ष्य मिलने पर यह उससे टकराकर विस्फोट करता है।

कुछ लोइटरिंग म्यूनिशन रडार से निकलने वाले संकेतों को पकड़ने की क्षमता भी रखते हैं। इस कारण इन्हें दुश्मन की वायु रक्षा प्रणाली और रडार के खिलाफ इस्तेमाल किया जा सकता है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी इनका इस्तेमाल रडार और सैन्य ठिकानों के खिलाफ किए जाने की बात सामने आई है।

कौन सा ड्रोन इस्तेमाल हुआ था?

जनरल चौहान ने इस घटना में इस्तेमाल किए गए हथियार का नाम नहीं बताया। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर कई रिपोर्टों और विश्लेषकों ने इसे इजरायली डिजाइन वाले IAI Harop से जोड़कर देखा है। भारत के पास हारोप सिस्टम पहले से मौजूद हैं और इसमें रडार जैसे लक्ष्यों को निशाना बनाने की क्षमता बताई जाती है।

इसके अलावा स्काईस्ट्राइकर, नागास्त्र-1, वारमेट और दूसरे लोइटरिंग म्यूनिशन भी संभावित विकल्पों के तौर पर बताए गए हैं। हालांकि, इस खास घटना में कौन सा सिस्टम इस्तेमाल हुआ था, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

ऑपरेशन सिंदूर में क्या था मुख्य उद्देश्य?

इस अभियान के दौरान भारतीय पक्ष का उद्देश्य पाकिस्तानी वायु रक्षा क्षमता को कमजोर करना भी था। इसके लिए रडार सिस्टम की पहचान और उन्हें निष्क्रिय करना महत्वपूर्ण माना गया। सरगोधा के आसपास भेजे गए लोइटरिंग म्यूनिशन इसी तरह के मिशन का हिस्सा थे।

किराना हिल्स की घटना यह भी बताती है कि आधुनिक युद्ध में इस्तेमाल होने वाले ऐसे हथियार लक्ष्य की तलाश करते हुए सीमित समय तक हवा में बने रह सकते हैं। अगर इस दौरान निर्धारित लक्ष्य नहीं मिलता, तो मिशन का परिणाम अलग हो सकता है।

इस पूरे घटनाक्रम से यह भी सामने आता है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने संवेदनशील इलाकों को लेकर अपने लक्ष्यों को सीमित रखने की कोशिश की। किराना हिल्स के पास हुई घटना को लेकर लंबे समय से चली आ रही अटकलों के बीच जनरल अनिल चौहान की जानकारी ने इसकी एक अलग तस्वीर सामने रखी है।

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