नोएडा में वेतन वृद्धि को लेकर संग्राम जारी: ₹20,000 न्यूनतम मजदूरी की मांग पर अड़े कर्मचारी, पुलिस से फिर हुई झड़प

औद्योगिक क्षेत्रों में मंगलवार को भी प्राइवेट कंपनियों के कर्मचारियों का विरोध प्रदर्शन जारी रहा। वेतन बढ़ोतरी के सरकारी फैसले के बावजूद श्रमिकों में नाराजगी कम नहीं हुई है। प्रदर्शन के दौरान कई जगह पुलिस और कर्मचारियों के बीच झड़प देखने को मिली, जिसके बाद हालात संभालने के लिए पुलिस को हल्का बल प्रयोग करना पड़ा।

नोएडा में मजदूरों का उग्र प्रदर्शन
नोएडा में मजदूरों का उग्र प्रदर्शन

Noida Workers Protest: नोएडा के औद्योगिक क्षेत्रों में वेतन वृद्धि को लेकर शुरू हुआ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। सोमवार की भारी हिंसा के बाद आज मंगलवार को भी नोएडा फेज-2 और सेक्टर-63 समेत कई इलाकों में कर्मचारियों का प्रदर्शन जारी रहा। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा सोमवार देर रात न्यूनतम मजदूरी दरों में बढ़ोतरी के आदेश जारी किए जाने के बावजूद कर्मचारी संतुष्ट नहीं हैं। प्रदर्शनकारियों का स्पष्ट कहना है कि सरकार द्वारा बढ़ाई गई राशि ऊंट के मुंह में जीरा समान है और वे ₹20,000 से कम न्यूनतम मजदूरी पर समझौता नहीं करेंगे।

“11 हजार में दम नहीं, 20 हजार से कम नहीं”

मंगलवार सुबह नोएडा फेज-2 में बड़ी संख्या में कर्मचारी सड़कों पर उतरे और सरकार व फैक्ट्री प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन का एक वीडियो भी सामने आया है जिसमें कर्मचारी “11 हजार में दम नहीं, 20 हजार से कम नहीं” के नारे लगा रहे हैं। कर्मचारियों का तर्क है कि मौजूदा महंगाई के दौर में ₹20,000 से कम वेतन में परिवार का भरण-पोषण करना नामुमकिन है। हालांकि सरकार ने 1 अप्रैल 2026 से लागू होने वाली दरों में करीब ₹3,000 तक का इजाफा किया है, लेकिन श्रमिकों ने इसे अपर्याप्त बताते हुए खारिज कर दिया है।

पुलिस के साथ झड़प और लाठीचार्ज

प्रदर्शन के दौरान कई जगहों पर पुलिस और श्रमिकों के बीच तीखी झड़प हुई। जब भीड़ ने बैरिकेडिंग तोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश की, तो पुलिस को स्थिति नियंत्रित करने के लिए हल्का बल प्रयोग और लाठीचार्ज करना पड़ा। सोमवार को हुई हिंसा के मद्देनजर पुलिस पहले से ही हाई अलर्ट पर है। अधिकारियों ने बताया कि कल के उपद्रव के मामले में अब तक 350 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है, जबकि सीसीटीवी फुटेज के आधार पर अन्य दंगाइयों की पहचान की जा रही है।

उत्पादन ठप और तबाही के निशान

इस विवाद का सबसे बुरा असर औद्योगिक उत्पादन पर पड़ा है। मजदूर काम पर नहीं पहुंच रहे हैं, जिससे दर्जनों फैक्ट्रियों में उत्पादन पूरी तरह ठप हो गया है। सेक्टर-63 जैसे इलाकों में अभी भी सोमवार की हिंसा के निशान मौजूद हैं। सड़कों के किनारे जली हुई कारें और फैक्ट्रियों के टूटे हुए शीशे खौफनाक मंजर बयां कर रहे हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कल 400 से 500 की भीड़ ने फैक्ट्रियों में घुसकर तोड़फोड़ की और कैमरों को नुकसान पहुंचाया।

प्रबंधन और प्रशासन की स्थिति

एक तरफ जहां श्रमिक संगठन ₹20,000 की मांग पर अड़े हैं, वहीं फैक्ट्री प्रबंधन का कहना है कि अचानक इतनी बड़ी वेतन वृद्धि से उत्पादन लागत बढ़ जाएगी, जिससे व्यापार करना मुश्किल होगा। प्रबंधन बातचीत की बात तो कह रहा है लेकिन इसके लिए समय की मांग कर रहा है। दूसरी ओर, उत्तर प्रदेश सरकार ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान बढ़ोतरी एक तात्कालिक फैसला है और भविष्य में वेज बोर्ड के माध्यम से व्यापक समीक्षा कर स्थाई समाधान निकाला जाएगा। फिलहाल, नोएडा के औद्योगिक क्षेत्रों में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है और भारी पुलिस बल तैनात है।

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