New Tax on Tobacco: केंद्र सरकार अब गुटखा और पान मसाला उद्योग पर अब तक की सबसे सख्त कार्रवाई करने की तैयारी में है। लंबे समय से इन उत्पादों को लेकर बढ़ते स्वास्थ्य जोखिम, टैक्स चोरी और इनके बढ़ते उपभोग पर चिंता जताई जा रही थी। इसी पृष्ठभूमि में सरकार अब एक बड़ा वित्तीय कदम उठाने जा रही है। सरकार “नेशनल सिक्योरिटी और जन स्वास्थ्य सेस” नाम का नया टैक्स लागू करने की योजना बना रही है। इस टैक्स को लगाने का उद्देश्य न केवल गुटखा व पान मसाला उद्योग पर नियंत्रण बढ़ाना है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े मिशनों के लिए अतिरिक्त धन जुटाना भी है।
इसके लिए सरकार आगामी शीतकालीन सत्र में “हेल्थ सिक्योरिटी सेस और नेशनल सिक्योरिटी सेस बिल 2025” संसद में पेश करने जा रही है। सरकार इसे एक बड़े आर्थिक और सार्वजनिक स्वास्थ्य सुधार की तरह देख रही है। उम्मीद है कि इस बिल को पास करके सरकार ऐसे उत्पादों पर और कड़ी निगरानी सुनिश्चित करेगी, जिनके इस्तेमाल से गंभीर बीमारियों और आर्थिक नुकसान का खतरा बढ़ा है।
इस प्रस्तावित विधेयक के तहत यह नया सेस गुटखा और पान मसाला बनाने वाली मशीनों और उत्पादन प्रक्रिया पर लागू होगा। यानी यह टैक्स तैयार उत्पाद की मात्रा पर नहीं बल्कि उत्पादन क्षमता के आधार पर वसूला जाएगा। चाहे कोई कंपनी मशीनों से उत्पादन कर रही हो या हाथों से, उसे हर महीने यह सेस चुकाना होगा। हाथ से उत्पादन करने वालों के लिए भी एक निश्चित मासिक शुल्क निर्धारित किया जाएगा।
#wintersession2025
— SansadTV (@sansad_tv) December 1, 2025
FM @nsitharaman introduces The Health Security se National Security Cess Bill, 2025 in Lok Sabha.
The bill to augment the resources for meeting expenditure on national security and for public health, and to levy a cess for the said purposes on… pic.twitter.com/qTYQH4H70s
इस टैक्स से मिलने वाली राशि सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा कार्यक्रमों और पब्लिक हेल्थ परियोजनाओं पर खर्च करेगी। जरूरत पड़ने पर सरकार इस सेस को भविष्य में दोगुना भी कर सकती है। इस कानून का उल्लंघन करने वालों पर पांच साल तक की जेल की सजा का प्रावधान रखा गया है। हालांकि कंपनियों को अपीलीय अधिकारियों से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक अपील का अधिकार मिलेगा।
इस कानून के लागू होने के बाद हर निर्माता को अनिवार्य रूप से सरकार के साथ रजिस्ट्रेशन कराना होगा और बिना रजिस्ट्रेशन उत्पादन करना अवैध माना जाएगा। इसके साथ ही पान मसाला और गुटखा बनाने वाली कंपनियों को हर महीने उत्पादन से जुड़ा रिटर्न भी दाखिल करना होगा। सरकारी अधिकारी समय-समय पर उत्पादन स्थल का निरीक्षण और ऑडिट कर सकेंगे।
अगर कोई मशीन या उत्पादन इकाई किसी कारणवश पंद्रह दिनों से अधिक समय तक बंद रहती है, तो उस अवधि के लिए सेस में राहत दी जा सकती है।
सरकार का यह प्रस्ताव देश में तंबाकू और पान मसाला उद्योग पर नकेल कसने की दिशा में सबसे बड़ा कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह बिल कानून का रूप ले लेता है तो इसका असर न केवल उद्योग पर पड़ेगा बल्कि इस तरह के उत्पादों की उपलब्धता और उपयोग पर भी नियंत्रण बढ़ेगा।
