NEET UG 2026 Paper Leak: सीकर में सीबीआई का बड़ा खुलासा, हाथ से लिखकर और PDF बनाकर लीक किया गया था नीट का पेपर

NEET UG 2026 Paper Leak: देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट यूजी-2026 एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गई है। पेपर लीक मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं।

NEET UG 2026 पेपर लीक में सीकर कनेक्शन! CBI जांच में बड़े खुलासे
NEET UG 2026 पेपर लीक में सीकर कनेक्शन! CBI जांच में बड़े खुलासे

NEET UG 2026 Paper Leak: देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET UG-2026 एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गई है। पेपर लीक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की ताजा जांच ने राजस्थान कनेक्शन को लेकर कई बड़े खुलासे किए हैं। इन खुलासों के बाद शिक्षा नगरी सीकर से लेकर दिल्ली तक हड़कंप मच गया है। जांच एजेंसियों के अनुसार लीक हुआ प्रश्नपत्र राजस्थान तक पहुंचा था और इसे बेहद शातिर तरीके से हाथ से लिखकर स्कैन किया गया, ताकि डिजिटल ट्रैकिंग से बचा जा सके।

CBI सूत्रों के मुताबिक इस पूरे नेटवर्क की शुरुआत यश यादव नामक युवक से हुई। यश आयुर्वेदिक मेडिकल साइंसेज का छात्र बताया जा रहा है और वह पहले भी NEET परीक्षा पास करने में असफल रहा था। जांच में सामने आया है कि पेपर लीक नेटवर्क में वह अहम कड़ी के रूप में काम कर रहा था। उसके जरिए ही प्रश्नपत्र विकास बिवाल तक पहुंचा।

जांच में सबसे चौंकाने वाला नाम विकास बिवाल के पिता दिनेश बिवाल का सामने आया है। आरोप है कि दिनेश बिवाल ने लीक हुए प्रश्नपत्र की हार्ड कॉपी को पहले हाथ से दोबारा लिखा और फिर उसे स्कैन कर PDF फाइल तैयार की। इसके बाद यह डिजिटल फाइलें सीकर के विभिन्न कोचिंग संस्थानों में पढ़ने वाले छात्रों तक पहुंचाई गईं। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह तरीका सबूत मिटाने और मूल दस्तावेज की पहचान छिपाने के लिए अपनाया गया।

CBI पूछताछ में शामिल कुछ छात्रों ने स्वीकार किया है कि उन्हें पेपर उपलब्ध कराने के बदले 2 लाख से 5 लाख रुपये तक देने के लिए कहा गया था। अब जांच एजेंसी उन कोचिंग सेंटर संचालकों और स्टाफ से पूछताछ कर रही है, जिन पर इस अवैध सौदे में बिचौलिये की भूमिका निभाने का शक है। एजेंसी यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस पूरे नेटवर्क में कोचिंग संस्थानों की भूमिका कितनी गहरी थी।

मामले में शुभम खैरनार नाम का एक और बड़ा चेहरा सामने आया है, जिसे शुरुआती जांच में इस साजिश का मास्टरमाइंड माना जा रहा था। हालांकि पूछताछ के दौरान शुभम ने इन आरोपों से इनकार कर दिया है। इसके बाद CBI अब यह पता लगाने में जुटी है कि अगर शुभम मास्टरमाइंड नहीं है तो असली स्रोत कौन है। एजेंसी इस एंगल से भी जांच कर रही है कि पेपर प्रिंटिंग प्रेस से लीक हुआ या फिर किसी परीक्षा केंद्र से बाहर आया।

जांच एजेंसियों के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती पैसों के लेन-देन को साबित करना है। आरोपियों और संदिग्ध छात्रों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं। दिनेश बिवाल द्वारा तैयार की गई कथित PDF फाइलों के डिजिटल फुटप्रिंट्स खंगाले जा रहे हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह फाइलें किन-किन मोबाइल, लैपटॉप या अन्य डिवाइस से होकर गुजरीं।

राजस्थान का सीकर जिला, जो वर्षों से मेडिकल और इंजीनियरिंग प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का बड़ा केंद्र माना जाता है, अब इस संगठित पेपर लीक नेटवर्क के कारण सवालों के घेरे में है। CBI की कार्रवाई के बाद आने वाले दिनों में कुछ बड़े कोचिंग संचालकों और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की गिरफ्तारी की संभावना जताई जा रही है। पूरे देश की नजर अब इस जांच पर टिकी है, क्योंकि लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ा यह मामला राष्ट्रीय चिंता का विषय बन चुका है।

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