Fuel Saving Drive: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील पर अमल करते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उनके मंत्रिमंडल ने ईंधन बचाने की दिशा में एक बड़ी मिसाल पेश की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने काफिले की गाड़ियों की संख्या घटाकर केवल दो कर दी है। इसका उदाहरण बुधवार को तब देखने को मिला जब वह दिवंगत प्रतीक यादव को श्रद्धांजलि देने पहुंचे। उस समय उनके काफिले में केवल दो कारें मौजूद थीं, जिनमें से एक में सुरक्षाकर्मी और दूसरी में मुख्यमंत्री अपने निजी स्टाफ के साथ सवार थे।
मुख्यमंत्री की इस पहल का अनुसरण करते हुए दोनों उप-मुख्यमंत्री, केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक ने भी अपनी फ्लीट में शामिल एस्कॉर्ट की छह गाड़ियों की संख्या को घटाकर तीन कर दिया है। इसके साथ ही सरकार के कामकाज के तरीकों में भी बदलाव देखने को मिल रहा है, जहां विभागीय बैठकों को वर्चुअल माध्यम से करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। दोनों उप-मुख्यमंत्रियों ने जनता से भी ईंधन बचाने के लिए वर्क फ्रॉम होम, ऑनलाइन मीटिंग, इंडक्शन चूल्हों के उपयोग और घरों में सोलर प्लांट लगाने जैसी अपील की है।
मंत्रिमंडल के अन्य सदस्य भी इस अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं। उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने अपने काफिले की गाड़ियां कम करने के साथ ही विभाग की सभी बैठकों को वर्चुअल करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्वदेशी अपनाने और विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार की भी बात कही है। इसी तरह व्यावसायिक शिक्षा एवं कौशल विकास राज्यमंत्री कपिलदेव अग्रवाल ने दूसरे शहरों की यात्राओं के लिए काफिले के बजाय ट्रेन को प्राथमिकता देना शुरू कर दिया है और अधिकारियों को भी ऑनलाइन बैठकें करने के सख्त निर्देश दिए हैं।
हालांकि, मंत्रियों की इस सक्रियता के उलट शासन के अधिकारियों और कर्मचारियों पर इन निर्देशों का खास असर नजर नहीं आ रहा है। सचिवालय और उसके आसपास के परिसरों का नजारा मंत्रियों के दावों से बिल्कुल अलग कहानी बयां कर रहा है। विधान भवन, बापू भवन, एनेक्सी और योजना भवन की पार्किंग पूरी तरह से भरी हुई है। मल्टीलेवल पार्किंग फुल होने के कारण वाहन परिसरों के बाहर और सड़कों पर खड़े नजर आए। यहां तक कि मंत्रियों के एस्कॉर्ट की गाड़ियों को भी सड़क पर खड़ा होना पड़ा, जो यह दर्शाता है कि सचिवालय के अधिकारी और कर्मचारी अभी भी इस मुहिम को लेकर गंभीर नहीं हुए हैं।
