एडमिरल दिनेश त्रिपाठी ने लोथल में राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर की प्रगति की समीक्षा की

नौसेना प्रमुख को गुजरात, दमन और दीव नौसेना क्षेत्र के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग आरएडीएम सतीश वासुदेव तथा एनएमएचसी लोथल के ऑफिसर-इन-चार्ज कमांडर रंजोत सिंह ने चरण 1ए की प्रगति के बारे में जानकारी दी, जिसके 2025 के अंत तक पूरा होने की उम्मीद है।

Naval Chief Admiral Dinesh Tripathi Reviews Construction of National Maritime Heritage Complex
Naval Chief Admiral Dinesh Tripathi Reviews Construction of National Maritime Heritage Complex

नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी ने 03 सितंबर, 2025 को गुजरात के लोथल में राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर (एनएमएचसी) का दौरा किया। उनके इस कार्यक्रम में राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर का व्यापक दौरा, प्रमुख नौसैन्य प्रदर्शनियों और विरासत कलाकृतियों का अवलोकन, निर्माण प्रगति की समीक्षा, परियोजना हितधारकों के साथ संवाद तथा वरुण नौसेना परिसर का भ्रमण शामिल था।

नौसेना प्रमुख ने लोथल स्थित ऐतिहासिक पुरातात्विक स्थल का भी दौरा किया, जिससे भारतीय नौसेना के देश की समृद्ध समुद्री विरासत से जुड़ाव की पुष्टि हुई।

लोथल स्थित एनएमएचसी एक ऐतिहासिक परियोजना है, जिसे पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्रालय द्वारा गुजरात सरकार के सहयोग और भारतीय नौसेना के योगदान से विकसित किया जा रहा है। यह संग्रहालय 400 एकड़ में फैला हुआ है और विश्व के सबसे बड़े समुद्री संग्रहालयों में से एक होगा। इस परियोजना का उद्देश्य भारत की समृद्ध समुद्री विरासत और इसकी नौसैन्य विकास गाथा को प्रदर्शित करना है, जिसमें भारतीय नौसेना के विकास को समर्पित एक गैलरी भी शामिल है।

नौसेना प्रमुख को इस यात्रा के दौरान, युद्धपोत निशंक, आईएल-38 एसडी समुद्री टोही विमान, यूएच-3एच सहित नौसेना के अन्य हेलीकॉप्टर, डेक पर तैनात लड़ाकू विमान सी हैरियर और एके-176 जीएम, 4.5 इंच जीएम तथा जेडआईएफ 101 एसएएम लांचर जैसी नौसेना की विभिन्न कलाकृतियों का भ्रमण कराया गया। प्रदर्शन पर रखी गई भारी कलाकृतियों में मिसाइल मॉडल (पी-21, ब्रह्मोस), इंजन मॉडल (आईसीई, जीटी), अंडरवाटर चैरियट तथा सी ईगल मिसाइल प्रणाली शामिल हैं।

नौसेना प्रमुख को गुजरात, दमन और दीव नौसेना क्षेत्र के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग आरएडीएम सतीश वासुदेव तथा एनएमएचसी लोथल के ऑफिसर-इन-चार्ज कमांडर रंजोत सिंह ने चरण 1ए की प्रगति के बारे में जानकारी दी, जिसके 2025 के अंत तक पूरा होने की उम्मीद है।

नौसेना प्रमुख ने नवनिर्मित वरुण नौसेना परिसर का भी दौरा किया, जिसे भारतीय नौसेना द्वारा एनएमएचसी स्थल पर प्रशासनिक एवं आवासीय सुविधा केंद्र के रूप में तैयार किया गया है। वहां तैनात नौसेना कर्मी इस परियोजना की प्रगति पर बारीकी से नजर रखेंगे और नौसेना की कलाकृतियों का रखरखाव करेंगे। उन्होंने मैरीटाइम हेरिटेज सोसाइटी (एमएचएस) के उप निदेशक कमोडोर दोराईबाबू और इंडियन पोर्ट्स रेल एंड रोपवेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (आईपीआरसीएल) तथा टाटा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड के प्रतिनिधियों सहित चल रही परियोजना से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की। नौसेना प्रमुख ने एनएमएचसी को “भारत के समुद्री इतिहास, वर्तमान व भविष्य का जीवंत प्रमाण” बताते हुए नौसेना व हितधारकों के बीच तालमेल की सराहना की, उनके प्रयासों की प्रशंसा की और टीम को गति बनाए रखने के लिए प्रोत्साहित किया।

नौसेना प्रमुख ने लोथल में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) स्थल का भी दौरा किया, जो अपने ऐतिहासिक गोदी, मोती-मनका कार्यशालाओं और मेसोपोटामिया तथा मिस्र के साथ लगभग 4,000 साल पुराने समुद्री व्यापार संबंधों के लिए प्रसिद्ध है। उन्होंने कहा कि लोथल की समुद्री विरासत 21वीं सदी में भारतीय नौसेना के दृष्टिकोण को प्रेरित करती रहेगी।

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