मुंबई: मुंबई नगर निगम (बीएमसी) के हालिया चुनावों के बाद मायानगरी की राजनीति एक नए विवाद के कारण गरमा गई है। एम-ईस्ट वार्ड (गोवंडी और देवनार) से पहली बार वार्ड समिति अध्यक्ष का पद जीतने वाली एआईएमआईएम (AIMIM) पार्षद खैरुन्निसा अख्तर हुसैन अपने कार्यालय में लगाई गई एक तस्वीर को लेकर विरोधियों के निशाने पर आ गई हैं। विवाद की जड़ पार्षद के पति अकबर हुसैन की वह तस्वीर है, जिसे उन्होंने सरकारी कार्यालय की दीवार पर पार्टी अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी की तस्वीर के बगल में लगाया था।
अकबर हुसैन, जिसे पुलिस रिकॉर्ड में ‘राजू बटला’ के नाम से भी जाना जाता है, का एक लंबा आपराधिक इतिहास रहा है। उन पर हत्या, हत्या के प्रयास, जबरन वसूली और तस्करी जैसे 23 से अधिक गंभीर मामले दर्ज हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरा मानते हुए मुंबई पुलिस ने उनके खिलाफ तड़ीपार (शहर से निष्कासन) का आदेश जारी कर रखा है, जिसके तहत उनके मुंबई में प्रवेश पर कानूनी रूप से प्रतिबंध है।
जैसे ही सरकारी दफ्तर में एक घोषित अपराधी की तस्वीर लगाए जाने की खबर फैली, भारतीय जनता पार्टी ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई। भाजपा नेताओं ने सवाल उठाया कि कानून द्वारा प्रतिबंधित और आपराधिक रिकॉर्ड वाले व्यक्ति को सरकारी कार्यालय में इस तरह सम्मान कैसे दिया जा सकता है। विवाद को बढ़ता देख एआईएमआईएम नेतृत्व ने तुरंत हस्तक्षेप किया और तस्वीर हटाने का आदेश दिया, जिसके बाद उसे कार्यालय से हटा दिया गया है।
इस मामले में आम आदमी पार्टी ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। ‘आप’ की राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रीति शर्मा-मेनन ने आरोप लगाया कि अकबर हुसैन का नाम पूर्व भाजपा नेता एल.के. आडवाणी की हत्या की साजिश में भी सामने आया था, जिसके बाद वह राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में रहा था। उन्होंने तड़ीपार अपराधी की तस्वीर लगाने को लोकतांत्रिक संस्थाओं का अपमान बताया है। हालांकि तस्वीर हटा ली गई है, लेकिन इस घटना ने मुंबई की स्थानीय राजनीति में अपराध और सत्ता के गठजोड़ पर एक नई बहस छेड़ दी है।
