आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा में सुरक्षाबलों को नक्सल विरोधी अभियान में एक ऐसी कामयाबी मिली है जिसे राज्य में माओवादी गतिविधियों के अंत के रूप में देखा जा रहा है। सोमवार, 30 मार्च 2026 को एक शीर्ष माओवादी कमांडर सहित कुल 9 नक्सलियों ने एक साथ पुलिस के सामने अपने हथियार डाल दिए। पुलिस महानिदेशक हरीश कुमार गुप्ता ने इस घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि राज्य में अब भूमिगत माओवादी गतिविधियां लगभग शून्य के स्तर पर पहुंच चुकी हैं।
आत्मसमर्पण करने वाले इन नक्सलियों में सबसे प्रमुख नाम चेल्लूरी नारायण राव उर्फ सुरेश का है, जो पिछले 36 सालों से पुलिस की आँखों में धूल झोंककर अंडरग्राउंड रह रहा था। सुरेश सीपीआई (माओवादी) की सेंट्रल कमेटी का सदस्य और आंध्र-ओडिशा बॉर्डर स्पेशल जोनल कमेटी का सचिव भी रहा है, जिससे उसकी ताकत और संगठन में उसके ऊंचे ओहदे का अंदाजा लगाया जा सकता है।
सुरेश का आपराधिक इतिहास बेहद खौफनाक रहा है और वह सुरक्षाबलों के लिए दशकों से एक बड़ा सिरदर्द बना हुआ था। उस पर 2018 में पूर्व विधायक किदारी सर्वेश्वर राव और पूर्व विधायक सिवरी सोमेश्वर राव की निर्मम हत्या का मुख्य आरोपी होने का गंभीर आरोप है। इसके अलावा पुलिस बलों पर घात लगाकर किए गए कई हमलों यानी एम्बुश में भी उसका नाम प्रमुखता से शामिल रहा है।
इस सरेंडर के दौरान पुलिस ने नक्सलियों के पास से आधुनिक और घातक हथियारों का एक बड़ा जखीरा भी बरामद किया है, जिसमें 1 इंसास राइफल, 2 बीजीएल हथियार, 5 ‘.303’ राइफल्स और 5 एसबीबीएल गन के साथ-साथ कई संचार उपकरण और विस्फोटक शामिल हैं। इतनी बड़ी मात्रा में हथियारों की बरामदगी यह दर्शाती है कि ये नक्सली किस कदर लैस थे और अब उनके हटने से सुरक्षा का खतरा काफी कम हो गया है।
आंध्र प्रदेश सरकार की ‘सरेंडर और पुनर्वास नीति’ के तहत इन सभी पूर्व नक्सलियों को मुख्यधारा में जोड़ने के लिए विशेष वित्तीय सहायता और अवसर प्रदान किए जा रहे हैं। शीर्ष कमांडर सुरेश को उसके सरेंडर के बदले 25 लाख रुपये की राशि दी जाएगी, जबकि अन्य सदस्यों को उनकी रैंक के अनुसार 1 लाख से 5 लाख रुपये तक की मदद मिलेगी।
डीजीपी ने सभी 9 सदस्यों को तत्काल राहत के रूप में 20,000-20,000 रुपये नकद भी सौंपे हैं ताकि वे सम्मान के साथ अपना नया जीवन शुरू कर सकें। राज्य पुलिस के अनुसार, अब तक कुल 81 माओवादियों को गिरफ्तार किया जा चुका है और 106 ने सरेंडर किया है, जिससे यह साफ है कि हिंसा का रास्ता छोड़कर लोग अब विकास और शांति की ओर बढ़ रहे हैं।
