ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता (सुप्रीम लीडर) अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन के बाद कश्मीर घाटी के विभिन्न हिस्सों में गहरा शोक और गमगीन माहौल देखा जा रहा है। इस दुखद समाचार के सामने आने के बाद कश्मीर के कई इलाकों में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग शांतिपूर्ण ढंग से एकत्र हुए और उन्होंने दिवंगत नेता की याद में विशेष शोक सभाओं का आयोजन किया। इन सभाओं के माध्यम से कश्मीरी समुदाय ने ईरान के नागरिकों और वहां की सरकार के प्रति अपनी गहरी संवेदना और एकजुटता व्यक्त की है।
घाटी के प्रमुख इमामबाड़ों, मस्जिदों और धार्मिक स्थलों पर विशेष प्रार्थना सभाएं आयोजित की गईं, जहां अयातुल्ला अली खामेनेई की मगफिरत (आत्मा की शांति) के लिए सामूहिक दुआएं की गईं। इन धार्मिक और आध्यात्मिक कार्यक्रमों में स्थानीय लोगों के साथ-साथ युवाओं और बुजुर्गों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इस दौरान एकत्र हुए जनसमूह ने न केवल दिवंगत नेता को याद किया, बल्कि वैश्विक स्तर पर शांति, भाईचारे और इंसाफ के लिए भी सामूहिक रूप से ईश्वर से प्रार्थना की।
इस शोक के अवसर पर कश्मीरी समाज के प्रमुख धार्मिक और राजनीतिक नेताओं ने भी अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं। हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेता और मीरवाइज उमर फारूक ने अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन पर गहरा दुख प्रकट किया है। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि खामेनेई का जाना सिर्फ ईरान देश के लिए ही एक बड़ी क्षति नहीं है, बल्कि यह पूरी दुनिया के मुस्लिम समाज के लिए एक बेहद दुखद और भावुक कर देने वाली घड़ी है।
शोक सभाओं के दौरान कश्मीर के विभिन्न हिस्सों में वक्ताओं ने अयातुल्ला अली खामेनेई के लंबे और प्रभावशाली सार्वजनिक व धार्मिक जीवन को याद किया। कई धार्मिक विद्वानों ने समाज और अपने देश के प्रति उनके द्वारा दिए गए ऐतिहासिक योगदान का विशेष रूप से जिक्र करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। कई जगहों पर लोग खामेनेई की तस्वीरों के साथ मौन खड़े होकर और उनके प्रति सम्मान प्रकट करते हुए नजर आए, जिसने घाटी के माहौल को पूरी तरह गमगीन कर दिया।
