रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को विशाखापत्तनम में भारतीय नौसेना के नए स्टील्थ फ्रिगेट आईएनएस महेंद्रगिरि को औपचारिक रूप से नौसेना में शामिल किया। यह प्रोजेक्ट 17ए के तहत निर्मित छठा स्वदेशी युद्धपोत है और इसे नौसेना के ईस्टर्न फ्लीट में शामिल किया गया है।
नौसेना डॉकयार्ड, विशाखापत्तनम में आयोजित समारोह में रक्षा मंत्री ने कहा कि आंध्र प्रदेश देश के रक्षा और एयरोस्पेस निर्माण क्षेत्र में एक नई ताकत बनकर उभरा है। उन्होंने बताया कि आईएनएस महेंद्रगिरि हवा, समुद्र और पानी के नीचे से आने वाले खतरों का एक साथ मुकाबला करने में सक्षम है। इस अवसर पर कई वरिष्ठ नौसेना अधिकारी और गणमान्य लोग मौजूद रहे।
राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि हाल की वैश्विक घटनाओं ने यह साबित किया है कि किसी भी देश के लिए सक्षम और त्वरित प्रतिक्रिया देने वाली नौसेना कितनी महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने बताया कि पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद भारतीय नौसेना ने ऑपरेशन ऊर्जा सुरक्षा के तहत 9,000 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य का आवश्यक सामान लेकर जा रहे 18 व्यापारिक जहाजों को सुरक्षित मार्ग प्रदान किया।
Every warship has a journey.#Mahendragiri’s began with indigenous design and the craftsmanship that shaped her.
— SpokespersonNavy (@indiannavy) July 11, 2026
As the sixth Project 17A Nilgiri-class frigate prepares for commissioning, today #11Jul 26, witness the making of a frontline combatant built for the Navy of… pic.twitter.com/C4lFtCALAY
उन्होंने कहा कि इससे यह स्पष्ट होता है कि भारतीय नौसेना केवल एक लड़ाकू शक्ति ही नहीं, बल्कि देश के आर्थिक हितों की भी मजबूत संरक्षक है।
आईएनएस महेंद्रगिरि को भारतीय नौसेना के वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो ने डिजाइन किया है, जबकि इसका निर्माण मुंबई की मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड ने किया है। यह भारत की सबसे आधुनिक स्टील्थ फ्रिगेट श्रृंखला का नया युद्धपोत है।
इस युद्धपोत में दुश्मन के रडार से बचने की विशेष तकनीक, उन्नत सुरक्षा क्षमता और उच्च स्तर का ऑटोमेशन दिया गया है। इसके साथ ही इसमें स्वदेशी हथियार, सेंसर और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली लगाई गई है, जिससे यह हवा, समुद्र की सतह और पानी के नीचे मौजूद खतरों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करने में सक्षम है।
Speaking at the Commissioning Ceremony of “INS Mahendragiri” in Visakhapatnam. https://t.co/1Z8SM7QDsp
— Rajnath Singh (@rajnathsingh) July 11, 2026
आईएनएस महेंद्रगिरि का 75 प्रतिशत से अधिक हिस्सा स्वदेशी है, यानी इसके निर्माण में अधिकांश सामग्री और तकनीक भारत में विकसित की गई है। इसे आत्मनिर्भर भारत अभियान की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया गया है। इसके निर्माण में देश की अनेक सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) इकाइयों का भी योगदान रहा है, जिससे रोजगार के अवसरों को भी बढ़ावा मिला है।
अधिकारियों के अनुसार, आईएनएस महेंद्रगिरि के नौसेना में शामिल होने से भारतीय नौसेना की युद्ध क्षमता और मजबूत हुई है। साथ ही यह भारत को स्वदेशी युद्धपोत निर्माण करने वाले अग्रणी देशों की श्रेणी में और मजबूती से स्थापित करता है। जहाज का आदर्श वाक्य “माइटी-मैजेस्टिक-मैचलेस” है, जो इसकी शक्ति और गरिमा का प्रतीक माना गया है।
