राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश एक बार फिर सदन के लिए नामित कर लिए गए हैं। गृह मंत्रालय के गजट में इस संबंध में आधिकारिक घोषणा की गई है। गजट के अनुसार, एक सदस्य की सेवानिवृत्ति के बाद खाली हुई सीट पर राष्ट्रपति ने उन्हें मनोनीत किया है। हरिवंश का पिछला कार्यकाल 9 अप्रैल को ही समाप्त हुआ था।
2014 से लगातार सदन का हिस्सा
प्रख्यात पत्रकार रहे हरिवंश नारायण सिंह को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का बेहद करीबी माना जाता है। वे पहली बार 2014 में राज्यसभा सदस्य के रूप में चुने गए थे। इसके बाद वे लगातार इस पद पर बने रहे। संसदीय सफर के दौरान उन्हें 9 अगस्त 2018 को पहली बार राज्यसभा का उपसभापति बनाया गया था, जिसके बाद 14 सितंबर 2020 को वे दोबारा इस पद पर निर्वाचित हुए। अब नए मनोनयन के बाद उनका कार्यकाल 2032 तक रहेगा।

कयासों पर लगा विराम
हाल ही में बिहार की पांच राज्यसभा सीटों के लिए हुए चुनाव के समय उम्मीदवारों की सूची में हरिवंश का नाम शामिल नहीं था। इसके बाद राजनीतिक गलियारों में यह कयास लगाए जा रहे थे कि शायद यह उनका अंतिम कार्यकाल होगा, लेकिन राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत किए जाने के बाद इन तमाम चर्चाओं पर विराम लग गया है।
उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के रहने वाले हरिवंश का जन्म 30 जून 1956 को हुआ था। उन्होंने काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) से स्नातक और पत्रकारिता की शिक्षा प्राप्त की है।
बिहार से अन्य नवनिर्वाचित सदस्य
बिहार की राजनीति के लिए इस बार का राज्यसभा चुनाव काफी सुर्खियों में रहा। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने खुद राज्यसभा जाने का निर्णय लेकर सबको चौंका दिया था। नीतीश कुमार के अलावा भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, रालोमो अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा, केंद्रीय राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर और भाजपा के शिवेश कुमार राज्यसभा सदस्य चुने गए हैं।
