Gurugram Rape Case: देश की सर्वोच्च अदालत ने सोमवार, 23 मार्च 2026 को गुरुग्राम में 4 साल की मासूम बच्ची के साथ हुई दरिंदगी के मामले में हरियाणा पुलिस और संबंधित मजिस्ट्रेट को कड़ी फटकार लगाई है। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान व्यवस्था की खामियों और जांच प्रक्रिया में दिखाई गई संवेदनहीनता पर गहरी चिंता व्यक्त की। कोर्ट ने तल्ख लहजे में कहा कि एक तथाकथित महानगर में इस तरह की लापरवाही और कानून की अनदेखी चौंकाने वाली है।
अदालत की नाराजगी का मुख्य कारण मजिस्ट्रेट द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया रही। सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि मजिस्ट्रेट ने 4 साल की पीड़ित बच्ची से आरोपी की मौजूदगी में सवाल पूछे और उस पर बार-बार ‘सच बोलने’ का दबाव बनाया। इस पर पीठ ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि पॉक्सो (POCSO) एक्ट के तहत आरोपी को बच्चे के करीब भी नहीं लाया जा सकता। सीजेआई ने सवाल उठाया कि एक सदमे से गुजर रहे बच्चे के साथ इस तरह का व्यवहार कैसे किया जा सकता है? क्या अधिकारियों को कानून की बुनियादी समझ भी नहीं है?
पुलिस की भूमिका पर भी वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कोर्ट को बताया कि मामले की जांच अधिकारी (IO), जो कि एक महिला हैं, पीड़ित परिवार पर केस वापस लेने का दबाव बना रही थीं। इतना ही नहीं, उक्त जांच अधिकारी को एक अन्य पॉक्सो मामले में रिश्वत लेने के आरोप में पहले ही निलंबित किया जा चुका है। कोर्ट इस बात पर हैरान रह गया कि पुलिस ने मामले में स्वतः संज्ञान लेकर एफआईआर (FIR) दर्ज करने के बजाय माता-पिता से पूछा कि ‘वे क्या चाहते हैं?’ अदालत ने स्पष्ट किया कि एफआईआर दर्ज करना पुलिस का प्राथमिक कर्तव्य है, न कि परिजनों की इच्छा पर निर्भर रहना।
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए गुरुग्राम के पुलिस कमिश्नर और जांच अधिकारी को आगामी बुधवार को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया है। साथ ही, हरियाणा सरकार से राज्य में तैनात महिला पुलिस अधिकारियों का पूरा विवरण मांगा गया है। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि पीड़ित परिवार का हलफनामा और मजिस्ट्रेट की टिप्पणियां सीलबंद लिफाफे में जमा की जाएं। अदालत ने साफ कर दिया है कि बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों में किसी भी स्तर पर दिखाई गई संवेदनहीनता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
