नई दिल्ली: केंद्रीय जनजातीय कार्य राज्यमंत्री दुर्गादास उइके ने राज्यसभा में बताया कि एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों (ईएमआरएस) का संचालन करने वाली स्वायत्त संस्था राष्ट्रीय आदिवासी छात्र शिक्षा समिति (एनईएसटीएस) ने छात्रों के स्वास्थ्य, स्वच्छता और समग्र कल्याण सुनिश्चित करने के लिए व्यापक दिशानिर्देश जारी किए हैं।
वित्त वर्ष 2024-25 तक प्रति छात्र प्रति वर्ष ₹1,09,000 की आवर्ती अनुदान सहायता दी जा रही थी, जिसे वित्त वर्ष 2025-26 से बढ़ाकर ₹1,47,062 कर दिया गया है। इस राशि में चिकित्सा व्यय, सीबीएसई शुल्क, स्टेशनरी, स्कूल बैग, सैनिटरी नैपकिन, संचालन और रखरखाव की लागत शामिल है। स्वस्थ वातावरण में पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने के लिए रसोइयों और मेस सहायकों की नियुक्ति भी अनिवार्य की गई है।
सभी ईएमआरएस में लड़कों और लड़कियों के लिए अलग-अलग छात्रावास हैं, जिनमें पर्याप्त शौचालय, स्नानघर, सुरक्षित पेयजल और अपशिष्ट निपटान सुविधाएँ उपलब्ध हैं। छात्राओं को सैनिटरी नैपकिन मुफ्त उपलब्ध कराए जाते हैं, और कई राज्यों में वेंडिंग मशीनें और भस्मक भी लगाए गए हैं।
इसके अतिरिक्त, प्रत्येक विद्यालय में एक परामर्शदाता और महिला स्टाफ नर्स की नियुक्ति की गई है, ताकि छात्रों की शारीरिक और मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके।
राज्य समितियाँ नियमित निरीक्षण के माध्यम से छात्रावास और शिक्षण सुविधाओं की गुणवत्ता का आकलन करती हैं और स्कूल छोड़ने के मामलों की रिपोर्ट राज्य सरकार को देती हैं। अब तक अपर्याप्त छात्रावास सुविधाओं के कारण छात्रों के स्कूल छोड़ने का कोई मामला दर्ज नहीं हुआ है।
