प्रयागराज में माघ मेला के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को पवित्र स्नान से रोके जाने और उनके साथ जा रहे बटुकों की शिखा खींचे जाने की कथित घटना ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में हलचल पैदा कर दी थी। विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर राज्य सरकार को घेरा, जिसके बाद सरकार डैमेज कंट्रोल की मुद्रा में नजर आई।
इसी क्रम में उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने गुरुवार सुबह लखनऊ स्थित अपने सरकारी आवास पर 101 बटुकों को आमंत्रित कर उनका सम्मान किया। उन्होंने बटुकों का फूल-मालाओं से स्वागत किया, तिलक लगाया और उनकी शिखा का आदर करते हुए आशीर्वाद लिया। इस आयोजन को सांस्कृतिक मूल्यों और परंपराओं के प्रति सम्मान के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है।
गौरतलब है कि इससे पहले एक कार्यक्रम में ब्रजेश पाठक ने कहा था कि शिखा का सम्मान होना चाहिए और परंपराओं का आदर करना समाज की जिम्मेदारी है। उन्होंने किसी ब्राह्मण की शिखा छूने को बेहद गंभीर अपराध बताते हुए इसे सनातन संस्कृति और परंपराओं का अपमान करार दिया था। उन्होंने ऐसी घटना को बड़ा पाप बताते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग भी की थी।
"बटुकों का सम्मान, हमारा सौभाग्य"
— Brajesh Pathak (@brajeshpathakup) February 19, 2026
आज आवास पर देव स्वरूप छोटे बटुक ब्राह्मणों ने अतिथि स्वरूप पधारकर हमें और हमारे आवास की धराभूमि को धन्य किया है, सभी बटुक ब्राह्मणों का सपत्नीक आत्मीय स्वागत एवं अभिनंदन करते हुए आशीर्वाद प्राप्त किया।
आप सभी के स्नेह, कृपा, और आशीर्वाद से… pic.twitter.com/gnfBFWWIYp
प्रयागराज की घटना के बाद सरकार की आलोचना हो रही थी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी हाल ही में कहा था कि सभी को मर्यादा में रहना चाहिए।
माघ मेले से जुड़ा यह प्रकरण अब केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं रह गया है, बल्कि राजनीतिक बहस का केंद्र बन चुका है। सरकार जहां सम्मान और परंपराओं के संरक्षण का संदेश देने की कोशिश कर रही है, वहीं विपक्ष इसे कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक संवेदनशीलता से जोड़कर सवाल उठा रहा है।
