Bihar Chartered Plane Controversy: बिहार में सरकारी संसाधनों के इस्तेमाल को लेकर सियासत गरमा गई है। मामला तब तूल पकड़ गया जब राष्ट्रीय जनता दल के विधायक Rahul Sharma ने विधानसभा में वरिष्ठ आईएएस अधिकारी निलेश कुमार देवरे पर चार्टर्ड विमान के कथित निजी उपयोग का आरोप लगाया। इसके बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए और विवाद ने राजनीतिक के साथ-साथ सामाजिक रंग भी ले लिया।
विधानसभा में मुद्दा उठाते हुए राहुल शर्मा ने कहा कि पिछले साल जून में एक प्रीमियम चार्टर्ड विमान, Dassault Falcon 2000, से एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अपने परिवार के साथ दिल्ली से पटना आए थे। उन्होंने सवाल किया कि क्या बिहार सरकार के अधिकारी इस तरह चार्टर्ड प्लेन में यात्रा करने की हैसियत रखते हैं और यदि यह सरकारी विमान था तो उसके उपयोग की शर्तें क्या थीं। उन्होंने सरकार से पूरे मामले की जांच और उड़ान से जुड़ा रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की मांग की। बताया जाता है कि फाल्कन 2000 जैसे विमान से दिल्ली-पटना की एकतरफा उड़ान का किराया लगभग 20 लाख रुपये तक हो सकता है, जबकि आम वाणिज्यिक उड़ान का किराया कुछ हजार रुपये से शुरू होता है।
इन आरोपों के बाद राज्य सरकार की ओर से मंत्री Ashok Choudhary ने कड़ा प्रतिवाद किया। उन्होंने कहा कि अधिकारी को उनकी जातीय पहचान के कारण निशाना बनाया जा रहा है। उनका तर्क था कि संबंधित आईएएस दलित समाज से आते हैं और उन्हें बेवजह राजनीतिक विवाद में घसीटा जा रहा है। अशोक चौधरी ने स्पष्ट किया कि जिस यात्रा का जिक्र किया जा रहा है, वह जुलाई 2025 की है और उस विमान में वे स्वयं मुख्यमंत्री Nitish Kumar के साथ मौजूद थे। उनके अनुसार, इसमें किसी तरह की अनियमितता नहीं थी और इसे अनावश्यक रूप से राजनीतिक रंग दिया जा रहा है।
मंत्री ने यह भी कहा कि निलेश देवरे ने स्वास्थ्य विभाग में रहते हुए दवा आपूर्ति में गड़बड़ी करने वाले 25 सप्लायर्स को ब्लैकलिस्ट किया था, जिससे कई हित प्रभावित हुए। उनके मुताबिक, वही समूह अब इस मुद्दे को हवा दे रहे हैं। सरकार का कहना है कि कठोर प्रशासनिक कार्रवाई करने वाले अधिकारियों के खिलाफ साजिशन आरोप लगाए जा रहे हैं और राज्य सरकार ऐसे अधिकारियों के साथ खड़ी है।
इस पूरे विवाद ने सरकारी पारदर्शिता, प्रशासनिक जवाबदेही और जातीय संवेदनशीलता—तीनों प्रश्नों को एक साथ खड़ा कर दिया है। विपक्ष इसे सरकारी संसाधनों के संभावित दुरुपयोग का मामला बता रहा है, जबकि सरकार इसे राजनीतिक पूर्वाग्रह और प्रशासनिक सख्ती के खिलाफ प्रतिक्रिया करार दे रही है। अब निगाहें इस पर हैं कि सरकार इस मुद्दे पर क्या आधिकारिक स्पष्टीकरण देती है और क्या चार्टर्ड उड़ान से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक किए जाते हैं।
