Sugar Price Hike: देश भर में त्योहारी सीजन के बीच चीनी की कीमतों में दर्ज की जा रही बेतहाशा बढ़ोतरी को लेकर छिड़े राजनीतिक घमासान पर केंद्र सरकार की ओर से स्थिति स्पष्ट की गई है। खुदरा बाजार में चीनी के दाम उछलकर 65 रुपये प्रति किलोग्राम या उससे भी अधिक तक पहुंच गए हैं, जिससे त्योहारों की मिठास पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। इस मुद्दे पर विपक्ष के तीखे हमलों और जारी खींचतान के बीच केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने मीडिया को संबोधित करते हुए आश्वस्त किया है कि देश में चीनी की कोई कमी नहीं है और सरकार कीमतों को नियंत्रित करने तथा बाजार में सुचारू आपूर्ति बनाए रखने के लिए हर संभव कदम उठा रही है।
विपक्ष की ओर से लगाए जा रहे उन आरोपों को केंद्र सरकार ने पूरी तरह से खारिज कर दिया है, जिनमें दावा किया जा रहा था कि गन्ने का उपयोग इथेनॉल बनाने के लिए किए जाने की वजह से देश में चीनी की किल्लत और महंगाई बढ़ी है। केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने साफ किया कि चीनी के दामों में उछाल के पीछे इथेनॉल की कोई भूमिका नहीं है। उन्होंने कीमतों में इस तेजी की मुख्य रूप से दो वजहें बताईं— पहली ‘रेड रॉट’ (गन्ने का लाल सड़न रोग) और दूसरी ‘अल नीनो’ का असर। मंत्री ने बताया कि इन दोनों अनपेक्षित कारणों से न केवल भारत में बल्कि दुनिया भर में गन्ने सहित कई कृषि फसलों के उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।
केंद्रीय मंत्री ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि भारत में चीनी की कुल घरेलू जरूरत लगभग 280 लाख टन की है, जबकि आज की तारीख में देश के पास करीब 36 लाख टन चीनी का सरप्लस (अतिरिक्त) स्टॉक मौजूद है। ऐसे में देश में चीनी की कमी का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता। प्रह्लाद जोशी ने कहा कि सरकार आम जनता को पुरानी दरों पर चीनी उपलब्ध कराने के लिए बेहद गंभीर है। इसके लिए राज्य सरकारों को निर्देश दिए गए हैं कि वे मिलों और व्यापारियों के पास मौजूद उपलब्ध स्टॉक को तेजी से बाजार में लाएं ताकि जमाखोरी और सट्टेबाजी पर रोक लगाई जा सके।
आगामी प्रमुख त्योहारों को देखते हुए केंद्र सरकार ने एक तात्कालिक उपाय के रूप में 31 अक्टूबर 2026 तक बिना किसी सीमा शुल्क (ज़ीरो ड्यूटी) के 10 लाख टन तक कच्ची चीनी के आयात की भी मंजूरी दे दी है। मंत्री ने कहा कि यह कदम एहतियाती तौर पर उठाया गया है ताकि त्योहारों के चरम मांग वाले दिनों में कीमतों में होने वाले किसी भी अवांछित उछाल को रोका जा सके। वहीं, दूसरी ओर मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर अल नीनो का प्रभाव जारी रहने से आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी उत्पादन पर दबाव बना रह सकता है, जिसे देखते हुए भारत सरकार की यह आयात नीति घरेलू बाजार को स्थिरता प्रदान करेगी।
