Bank Strike Alert: बैंक कर्मचारियों की लंबी अवधि से लंबित मांगों को लेकर यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स (UFBU) ने शुक्रवार, 11 सितंबर 2026 को देशभर में एक दिवसीय बैंक हड़ताल का आह्वान किया है। गुरुवार सुबह बैंक प्रबंधन और यूनियनों के बीच हुई सुलह वार्ता के बेनतीजा खत्म होने के बाद हड़ताल होना तय हो गया है। इस हड़ताल के कारण देशभर के सरकारी बैंकों की शाखाओं में कामकाज ठप रहने या कर्मचारियों की भारी कमी होने की आशंका है। देश के सबसे बड़े बैंक, भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने अपने ग्राहकों से अपील की है कि वे अपने जरूरी बैंकिंग कार्य तुरंत निपटा लें और हड़ताल के दिन डिजिटल बैंकिंग सेवाओं का ही उपयोग करें।
हड़ताल के कारण सार्वजनिक क्षेत्र के सभी प्रमुख बैंकों की सेवाएं बुरी तरह प्रभावित रहेंगी, हालांकि अधिकांश निजी और विदेशी बैंक खुले रहेंगे। इसके बावजूद, इंटरबैंक क्लीयरिंग प्रणाली से जुड़े होने के कारण निजी बैंकों के चेक क्लीयरेंस और ट्रांसफर जैसे कामकाज पर भी आंशिक असर पड़ेगा। हड़ताल के अगले दो दिन, यानी 12 और 13 सितंबर को महीने का दूसरा शनिवार और रविवार होने के कारण बैंक बंद रहेंगे। ऐसे में कई शहरों में चेक क्लीयरेंस, ड्राफ्ट बनाने और मैन्युअल केवाईसी जैसे कागजी कामकाज लगातार चार दिनों तक प्रभावित रह सकते हैं।
यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स की मुख्य मांग हफ्ते में 5 दिन काम (5-डे बैंकिंग) लागू करना है, जिस पर दिसंबर 2023 और मार्च 2024 के समझौतों में सैद्धांतिक सहमति बन चुकी थी। इसके अलावा, यूनियन वरिष्ठ अधिकारियों के लिए संशोधित परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) और समान महंगाई भत्ते (DA) फॉर्मूले के साथ पेंशन अपडेशन की भी मांग कर रही है। यूनियनों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया, तो वे 28 से 30 सितंबर तक तीन दिवसीय हड़ताल और 26 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन कामबंदी की दिशा में आगे बढ़ेंगे।
हड़ताल के दौरान एटीएम, यूपीआई (UPI), आईएमपीएस (IMPS), एनईएफटी (NEFT), आरटीजीएस (RTGS) और नेट बैंकिंग जैसी डिजिटल सेवाएं सुचारू रूप से चलती रहेंगी। हालांकि, बैंक शाखाओं से होने वाली नकद जमा-निकासी, लॉकर संचालन, डिमांड ड्राफ्ट और मैन्युअल केवाईसी से जुड़े कार्य पूरी तरह अटके रहेंगे। बैंक ग्राहकों को सलाह दी गई है कि वे अपनी ईएमआई (EMI) और सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) की किस्तों के लिए खातों में पर्याप्त बैलेंस बनाए रखें, ताकि ई-मैंडेट बाउंस होने पर किसी भी प्रकार की पेनाल्टी या वित्तीय नुकसान से बचा जा सके।
