कर्नाटक की वृक्ष माता सालूमरदा थिमक्का का 114 वर्ष की आयु में निधन, पर्यावरण के क्षेत्र में बड़ा नुकसान

थिमक्का ने अपने जीवन में कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त किए। उन्हें 1995 में राष्ट्रीय नागरिक पुरस्कार, 1997 में इंदिरा प्रियदर्शिनी वृक्षमित्र पुरस्कार और 2019 में पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इसके अलावा राज्योत्सव पुरस्कार और नादोजा पुरस्कार भी उन्हें मिल चुके थे।

Salumarada Thimmakka, Karnataka's 'Vriksha Maata' (Mother of Trees), Passes Away at 114
Salumarada Thimmakka, Karnataka's 'Vriksha Maata' (Mother of Trees), Passes Away at 114

Environmentalist Salumarada Thimmakka: कर्नाटक में वृक्षों के प्रति अपनी गहरी संवेदनशीलता और सेवा के लिए प्रसिद्ध वृक्ष माता सालूमरदा थिमक्का का आज निधन हो गया। 114 वर्ष की आयु में उनका निधन बेंगलुरु के जयनगर स्थित एक निजी अस्पताल में हुआ, जहां उन्हें सांस लेने में गंभीर तकलीफ के कारण भर्ती कराया गया था। 30 जून 1911 को तुमकुर जिले के गुब्बी तालुक में जन्मीं थिमक्का ने अपने जीवन को पेड़-पौधों की देखभाल और संरक्षण के लिए समर्पित कर दिया था। विवाह के बाद वे मगदी तालुक के चिक्कैया में रहने लगीं और अपने पेड़ों से वही लगाव रखा जैसे माता अपने बच्चों से करती है।

थिमक्का ने अपने जीवन में कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त किए। उन्हें 1995 में राष्ट्रीय नागरिक पुरस्कार, 1997 में इंदिरा प्रियदर्शिनी वृक्षमित्र पुरस्कार और 2019 में पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इसके अलावा राज्योत्सव पुरस्कार और नादोजा पुरस्कार भी उन्हें मिल चुके थे। अस्थमा की गंभीर स्थिति के चलते थिमक्का को 3 अक्टूबर 2023 को अपोलो स्पेशलिटी अस्पताल में भर्ती कराया गया था और तब से उनका इलाज चल रहा था। उनका निधन न केवल कर्नाटक बल्कि पूरे देश के लिए एक बड़ी क्षति है, जिन्होंने अपने जीवन में प्राकृतिक प्रेम और पर्यावरण संरक्षण की मिसाल कायम की।

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