वंशवाद पर शशि थरूर का वार: कहा- अब योग्यता को मिले जगह, कांग्रेस में मचा बवाल, बीजेपी ने कहा ‘खतरों का खिलाड़ी’

थरूर ने लिखा कि वंशवादी राजनीति केवल कांग्रेस तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे भारतीय उपमहाद्वीप में फैली हुई है। उन्होंने पाकिस्तान के भुट्टो परिवार, बांग्लादेश के शेख और जिया परिवार और श्रीलंका के राजपक्षे परिवार का भी उल्लेख किया।

Shashi Tharoor Fires on Dynasty, Demands Meritocracy; Congress Leaders Upset, BJP Calls Him 'Khatron Ke Khiladi'
Shashi Tharoor Fires on Dynasty, Demands Meritocracy; Congress Leaders Upset, BJP Calls Him 'Khatron Ke Khiladi'

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने ‘वंशवादी राजनीति’ पर बड़ा बयान देकर देश की राजनीति में हलचल मचा दी है। थरूर ने अपने लेख में कहा कि वंशवाद भारतीय लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा है, क्योंकि यह शासन की गुणवत्ता को कमजोर करता है। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि भारत में वंश की जगह योग्यता को प्राथमिकता दी जाए। थरूर के इस बयान के बाद न सिर्फ बीजेपी बल्कि कांग्रेस के अपने नेता भी उनके खिलाफ मैदान में उतर आए।

दरअसल, शशि थरूर ने 31 अक्टूबर को प्रोजेक्ट सिंडिकेट पर एक लेख लिखा, जिसमें उन्होंने बताया कि भारत के लगभग सभी राजनीतिक दलों में वंशवाद गहराई से मौजूद है। उन्होंने कहा कि “हर कोई अपने परिवार को आगे बढ़ाने में लगा हुआ है, जिससे लोकतंत्र का असली वादा अधूरा रह जाता है।” थरूर ने राहुल गांधी और तेजस्वी यादव का उदाहरण देते हुए भारत के “भाई-भतीजावाद” पर सीधा निशाना साधा।

थरूर ने लिखा कि वंशवादी राजनीति केवल कांग्रेस तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे भारतीय उपमहाद्वीप में फैली हुई है। उन्होंने पाकिस्तान के भुट्टो परिवार, बांग्लादेश के शेख और जिया परिवार और श्रीलंका के राजपक्षे परिवार का भी उल्लेख किया। भारत में उन्होंने बीजू पटनायक–नवीन पटनायक, बाल ठाकरे–उद्धव ठाकरे, और मुलायम सिंह–अखिलेश यादव जैसे उदाहरण दिए। थरूर ने कहा कि यह प्रवृत्ति “गांव से लेकर संसद तक” फैली है, जो लोकतंत्र के लिए सही नहीं है।

थरूर ने आगे कहा कि अब भारत को योग्यता आधारित राजनीति की ओर बढ़ना चाहिए। इसके लिए उन्होंने सुझाव दिया कि राजनीतिक दलों में आंतरिक लोकतंत्र को मजबूत किया जाए, नेताओं के कार्यकाल की सीमा तय की जाए और मतदाता भी उम्मीदवारों को उनकी क्षमता के आधार पर चुनें।

थरूर के इस लेख के बाद बीजेपी ने इसे कांग्रेस और गांधी परिवार पर बड़ा हमला बताया। बीजेपी प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा, “थरूर ने सच्चाई सामने रखी है कि आज राजनीति एक पारिवारिक व्यवसाय बन चुकी है।” उन्होंने शशि थरूर को “खतरों का खिलाड़ी” करार दिया।

वहीं कांग्रेस के कई नेताओं ने थरूर के बयान का विरोध किया। कांग्रेस नेता उदित राज ने कहा कि वंशवाद सिर्फ राजनीति में नहीं बल्कि हर क्षेत्र में है — “डॉक्टर का बेटा डॉक्टर बनता है, व्यापारी का बेटा व्यापारी बनता है, तो नेता का बेटा नेता क्यों नहीं बन सकता?” उन्होंने अमित शाह और ममता बनर्जी जैसे नेताओं के नाम लेते हुए कहा कि “वंशवाद की परंपरा सभी जगह है।”

कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने भी गांधी परिवार का बचाव करते हुए कहा कि “नेतृत्व योग्यता और बलिदान से आता है।” उन्होंने कहा, “नेहरू भारत के सबसे योग्य प्रधानमंत्री थे, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी ने देश के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। गांधी परिवार को वंश कहना अनुचित है।”

शशि थरूर के इस लेख ने एक बार फिर भारतीय राजनीति में वंशवाद बनाम योग्यता की बहस को तेज कर दिया है। एक तरफ कुछ लोग इसे लोकतंत्र के लिए जरूरी आत्ममंथन बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस के भीतर इसने विचारधारात्मक दरार को भी उजागर कर दिया है।

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