Washington DC: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट हाल ही में विवादों में घिर गई हैं। यह मामला उस समय सामने आया जब हफिंगटन पोस्ट के पत्रकार एस.वी. डेट ने व्हाइट हाउस को एक सवाल भेजा। पत्रकार ने पूछा कि राष्ट्रपति ट्रंप और राष्ट्रपति पुतिन के बीच यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के लिए संभावित बैठक के स्थान के चयन का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है।
इस सवाल के जवाब में लेविट ने अनुचित और विवादित टिप्पणी करते हुए कहा, “तुम्हारी मां ने।” इस जवाब के वायरल होने के बाद मीडिया और सोशल मीडिया में हंगामा मच गया। बाद में लेविट ने पत्रकार पर पलटवार किया और उसे “वामपंथी हैक” कह दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि डेट राष्ट्रपति ट्रंप के खिलाफ लगातार प्रचार कर रहे हैं और उनके सवालों का उद्देश्य पेशेवर पत्रकारिता नहीं बल्कि व्यक्तिगत विरोध दिखाना है। लेविट ने अपने पोस्ट में कहा, “जो एक्टिविस्ट पत्रकार बनकर पेश आते हैं, वे पेशे को नुकसान पहुंचाते हैं।”
For context, S.V. Dáte of the Huffington Post is not a journalist interested in the facts. He is a left-wing hack who has consistently attacked President Trump for years and constantly bombards my phone with Democrat talking points.
— Karoline Leavitt (@PressSec) October 20, 2025
Just take a look at @svdate’s feed, it reads… https://t.co/NxWn2mdUsa pic.twitter.com/v7owI5N4us
इस बीच, ट्रंप और पुतिन के बीच होने वाली बैठक की तारीख अभी तय नहीं हुई है, लेकिन उम्मीद जताई जा रही है कि यह हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट में आयोजित हो सकती है। यूक्रेनी राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की ने भी कहा कि यदि उन्हें आमंत्रित किया गया, तो वे बैठक में शामिल होंगे। रिपोर्टों के अनुसार, हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ऑर्बन के मास्को के साथ मधुर संबंध हैं, जबकि कीव की ओर से बैठक को लेकर कुछ आशंकाएँ हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस विवाद ने व्हाइट हाउस और प्रेस के बीच पहले से मौजूद तनाव को और बढ़ा दिया है। इस घटना ने मीडिया और प्रशासन के बीच बढ़ती तनातनी को दर्शाया है और ट्रंप-पुतिन संभावित बैठक के आसपास राजनीतिक चर्चा को और गर्म कर दिया है।
कुल मिलाकर, प्रेस सेक्रेटरी की टिप्पणी और पत्रकार के साथ उनका विवाद अमेरिकी मीडिया जगत में चर्चा का मुख्य विषय बन गया है। वहीं, ट्रंप और पुतिन की बैठक की तैयारियाँ अभी जारी हैं और इसके परिणाम अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर अहम प्रभाव डाल सकते हैं।
