भुवनेश्वर: लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला 29 अगस्त 2025 को भुवनेश्वर, ओडिशा में संसद और राज्य विधानमंडलों की अनुसूचित जातियों एवं अनुसूचित जनजातियों के कल्याण संबंधी समितियों के सभापतियों के राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन करेंगे। इस अवसर पर वे एक प्रदर्शनी का उद्घाटन करेंगे और एक स्मारिका का विमोचन भी करेंगे।
इस कार्यक्रम में ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी, केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री जुएल ओराम, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण संबंधी संसदीय समिति के सभापति डॉ. फग्गन सिंह कुलस्ते सहित अनेक विशिष्ट जन प्रतिनिधि सम्मेलन को संबोधित करेंगे। संसद और राज्य/संघ राज्य क्षेत्र विधानमंडलों की अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के कल्याण संबंधी समितियों के सभापति और सदस्य, ओडिशा सरकार के मंत्री और विधान सभा के सदस्य भी उद्घाटन समारोह में शामिल होंगे।
उद्घाटन सत्र में ओडिशा विधान सभा की अध्यक्ष मती सुरमा पाढ़ी स्वागत भाषण देंगी और विधान सभा के उपाध्यक्ष भवानी शंकर भोई धन्यवाद ज्ञापित करेंगे। दो दिवसीय सम्मेलन (29-30 अगस्त 2025) में 120 से अधिक प्रतिनिधि शामिल होंगे। सम्मेलन का विषय है—“अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के कल्याण, विकास और सशक्तीकरण में संसदीय और विधायी समितियों की भूमिका।”
सम्मेलन के समापन सत्र (30 अगस्त 2025) में ओडिशा के राज्यपाल डॉ. हरि बाबू कंभमपति विदाई भाषण देंगे। इस अवसर पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश, डॉ. फग्गन सिंह कुलस्ते, मती सुरमा पाढ़ी, ओडिशा के उपमुख्यमंत्री के. वी. सिंह देव और मती प्रवती परिदा भी सभा को संबोधित करेंगे। धन्यवाद ज्ञापन ओडिशा विधान सभा की अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण समिति के सभापति भास्कर मधेई करेंगे।
सम्मेलन में अनुसूचित जातियों एवं अनुसूचित जनजातियों के सशक्तीकरण के संवैधानिक उपायों को सुदृढ़ करने, सामाजिक-आर्थिक विकास को गति देने, सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान और वर्ष 2047 तक समावेशी विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन पर विचार-विमर्श होगा। साथ ही, संसदीय और राज्य विधानमंडल समितियों की जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में भी चर्चा होगी।
अनुसूचित जातियों एवं अनुसूचित जनजातियों के कल्याण संबंधी समितियों का पहला सम्मेलन 1976 में नई दिल्ली में हुआ था। इसके बाद 1979, 1983, 1987 और 2001 में ऐसे सम्मेलन आयोजित किए गए। इस बार यह सम्मेलन पहली बार दिल्ली से बाहर आयोजित किया जा रहा है।
