अमेरिका ने ईरान से जुड़ी बढ़ती तनातनी के बीच इराक की राजधानी बगदाद स्थित अपने दूतावास से कई कर्मचारियों को हटाने और बहरीन व कुवैत से गैर-जरूरी स्टाफ को वापस बुलाने का फैसला लिया है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने बुधवार को इस फैसले की पुष्टि की।
इस कदम से कई सवाल खड़े हो गए हैं –
क्या अमेरिका ईरान के खिलाफ कोई बड़ा सैन्य ऑपरेशन करने की तैयारी में है? क्या पाकिस्तान की ओर अमेरिका के अचानक झुकाव का इससे कोई संबंध है?
रोम में ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर पांचवें दौर की बातचीत चल रही है। अमेरिका साफ कर चुका है कि वह ईरान को यूरेनियम संवर्धन की अनुमति नहीं देगा, जबकि ईरान लगातार कह रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम सिर्फ नागरिक उपयोग के लिए है।
सूत्रों के अनुसार, बातचीत किसी भी समय टूट सकती है, और अमेरिका ने चुपचाप ईरान के परमाणु ठिकानों को निशाना बनाने की योजना भी तैयार कर ली है।
इसी के चलते बहरीन में स्थित अमेरिकी नौसेना अड्डे को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
कुछ विश्लेषकों का मानना है कि अगर अमेरिका को ईरान पर जमीनी कार्रवाई करनी पड़ी, तो उसके लिए ईरान की सीमा से लगे देशों में बेस जरूरी होंगे।
ऐसे में पाकिस्तान एकमात्र विकल्प है, जहां से अमेरिका को लॉजिस्टिक और रणनीतिक समर्थन मिल सकता है। शायद यही कारण है कि हाल के दिनों में अमेरिका की पाकिस्तान की तारीफें बढ़ गई हैं।
वहीं ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर युद्ध छिड़ा तो वह मध्य एशिया और खाड़ी में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाएगा।
