ईरान और अमेरिका के बीच पिछले कई महीनों से जारी तनाव के बीच अब ईरान के शीर्ष नेतृत्व में मतभेदों की खबरें भी सामने आ रही हैं। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार, ईरानी सत्ता प्रतिष्ठान के भीतर खींचतान बढ़ गई है। इसी बीच ऐसी खबरें हैं कि ईरान के सर्वोच्च नेतृत्व से जुड़े मोजतबा खामेनेई ने राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान को कथित तौर पर सख्त चेतावनी दी है कि यदि उन्होंने दोबारा इस्तीफे की धमकी देकर नीतियों पर दबाव बनाने की कोशिश की, तो उन्हें पद से हटाया जा सकता है। हालांकि, इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
रिपोर्टों के मुताबिक, मोजतबा खामेनेई ने राष्ट्रपति पेजेश्कियान के बजाय इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के वरिष्ठ कमांडर अहमद वहीदी को खुला समर्थन दिया है। वॉशिंगटन स्थित इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर (ISW) ने वरिष्ठ धर्मगुरु मोहम्मद बाकिर खाराजी के हवाले से दावा किया है कि राष्ट्रपति को स्पष्ट संदेश दिया गया है कि वे इस्तीफे की धमकी को राजनीतिक दबाव के साधन के रूप में इस्तेमाल न करें।
बताया जा रहा है कि राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान पहले भी सुरक्षा और विदेश नीति से जुड़े महत्वपूर्ण फैसलों में अपनी अनदेखी को लेकर असंतोष जता चुके हैं। कुछ मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने मई और जून में सर्वोच्च नेतृत्व को पत्र लिखकर पद छोड़ने की इच्छा भी व्यक्त की थी। हालांकि, उन्होंने औपचारिक रूप से इस्तीफा नहीं दिया और न ही ईरानी सरकार ने इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी किया।
इसी दौरान यह भी कहा जा रहा है कि ईरान की विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में IRGC का प्रभाव लगातार बढ़ा है। रिपोर्टों के अनुसार, अहमद वहीदी की भूमिका पहले से अधिक मजबूत हो गई है और राष्ट्रपति कार्यालय की निर्णय प्रक्रिया अपेक्षाकृत कमजोर हुई है। यदि यह स्थिति बनी रहती है, तो अमेरिका के प्रति ईरान का रुख और अधिक कठोर हो सकता है, क्योंकि IRGC लंबे समय से अमेरिका के साथ प्रत्यक्ष वार्ता का विरोध करता रहा है।
दूसरी ओर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में कहा था कि ईरान के साथ बातचीत की संभावना बनी हुई है और कूटनीतिक समाधान का रास्ता अभी खुला है। लेकिन ईरान ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा है कि अमेरिका के साथ उसकी कोई प्रत्यक्ष बातचीत नहीं चल रही है। ईरानी अधिकारियों ने ट्रंप के दावों को गलत बताया है।
हालांकि कुछ अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में दावा किया गया है कि दोनों देशों के बीच कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की मध्यस्थता से अप्रत्यक्ष संपर्क जारी है। इन रिपोर्टों के अनुसार, ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची भी अमेरिकी प्रतिनिधियों के साथ अप्रत्यक्ष संवाद में शामिल हो सकते हैं। लेकिन इस संबंध में भी दोनों देशों की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
ऐसे में ईरान के भीतर कथित सत्ता संघर्ष, IRGC की बढ़ती भूमिका और अमेरिका के साथ बातचीत को लेकर विरोधाभासी दावों ने पूरे घटनाक्रम को और जटिल बना दिया है। फिलहाल आधिकारिक स्तर पर केवल इतना स्पष्ट है कि तेहरान और वॉशिंगटन के बीच तनाव अभी भी बरकरार है, जबकि नेतृत्व से जुड़ी कई खबरें अभी तक स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हो सकी हैं।
