पुतिन के सबसे करीबी और रूस के पूर्व रक्षा मंत्री सर्गेई इवानोव का निधन; कभी माने जाते थे क्रेमलिन के अगले ‘उत्तराधिकारी’

रूस के पूर्व रक्षा मंत्री और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के लंबे समय तक करीबी सहयोगी रहे सर्गेई इवानोव का 73 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। क्रेमलिन ने शुक्रवार को उनके निधन की पुष्टि की, हालांकि मौत के कारण या उससे जुड़ी अन्य कोई जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई। राष्ट्रपति पुतिन ने इवानोव के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की है।

रूस के पूर्व रक्षा मंत्री सर्गेई इवानोव का निधन
रूस के पूर्व रक्षा मंत्री सर्गेई इवानोव का निधन

रूस के पूर्व रक्षा मंत्री और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बेहद करीबी रहे सर्गेई इवानोव का 73 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। एक समय उन्हें रूसी राजनीति में राष्ट्रपति पुतिन का सबसे संभावित उत्तराधिकारी माना जाता था। क्रेमलिन ने आधिकारिक तौर पर उनके निधन की पुष्टि करते हुए बताया कि इवानोव की मृत्यु शुक्रवार को हुई, हालांकि उनकी मौत की वजह या इससे जुड़ी अन्य कोई भी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। इस रहस्यमयी चुप्पी के बावजूद राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इवानोव के परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की है, जिसके बाद से रूसी समाज और सोशल मीडिया पर उनके राजनीतिक सफर और योगदान को लेकर लगातार चर्चाएं हो रही हैं।

सर्गेई इवानोव की पूरी पहचान और उनके करियर का ग्राफ सोवियत संघ की मशहूर खुफिया एजेंसी केजीबी (KGB) से जुड़ा हुआ था। लेनिनग्राद में जन्मे इवानोव ने जब केजीबी ज्वाइन की, तो वहीं लेनिनग्राद डायरेक्टोरेट में उनकी मुलाकात और दोस्ती व्लादिमीर पुतिन से हुई थी। 1970 के दशक के आखिर से शुरू हुई यह दोस्ती समय के साथ और गहरी होती चली गई। जब पुतिन 1998 में रूसी खुफिया एजेंसी एफएसबी (FSB) के प्रमुख बने, तो उन्होंने इवानोव को अपना डिप्टी नियुक्त किया। आगे चलकर जब पुतिन देश के राष्ट्रपति बने, तो उन्होंने 2001 में इवानोव को रूस का रक्षा मंत्री नियुक्त किया, जिस पद पर वे 2007 तक रहे। रक्षा मंत्री के तौर पर उन्होंने चेचन्या में दूसरे युद्ध के दौरान सेना के कामकाज और रणनीतियों को संभाला, जिसमें उस इलाके के अलगाववादी आंदोलनों को पूरी तरह कुचल दिया गया था।

इवानोव को रूसी राजनीति के भीतर ‘सिलोविकी’ का सबसे प्रमुख चेहरा माना जाता था, जो सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों से आए बेहद शक्तिशाली अधिकारियों का एक विशिष्ट समूह है। उनकी जासूसी पृष्ठभूमि और काम करने के अचूक अंदाज के कारण रूसी राजनीतिक हलकों में उन्हें ‘सोवियत जेम्स बॉन्ड’ भी कहा जाता था। उनके बारे में विख्यात पत्रकार मिखाइल ज़ीगर ने अपनी किताब ‘ऑल द क्रेमलिन मेन्स’ में लिखा है कि वह एक आदर्श सोवियत जासूस हैं जिन्हें आप भीड़ में अलग से नहीं पहचान सकते, वह बिल्कुल फिल्म ‘द मैट्रिक्स’ के एजेंट स्मिथ जैसे दिखाई देते हैं। 1990 के दशक में रूस की दो मुख्य खुफिया एजेंसियां एफएसबी और एसवीआर (फॉरेन इंटेलिजेंस सर्विस) उन्हें अपने साथ जोड़ने के लिए होड़ कर रही थीं, जिसमें अंततः पुतिन के एफएसबी प्रमुख बनने के बाद बाजी एफएसबी के हाथ लगी।

उनका राजनीतिक करियर उस समय सबसे बड़े मोड़ पर पहुंचा जब 2008 में पुतिन ने संवैधानिक सीमाओं के कारण राष्ट्रपति पद छोड़ने और प्रधानमंत्री बनने का फैसला किया। उस दौरान इवानोव को पुतिन की गद्दी का सबसे मजबूत दावेदार और उत्तराधिकारी माना जा रहा था। हालांकि, पुतिन ने अप्रत्याशित रूप से अपने एक अन्य पुराने सहयोगी दिमित्री मेदवेदेव को राष्ट्रपति पद के लिए चुना, ताकि वह खुद 2012 में दोबारा राष्ट्रपति के रूप में वापसी कर सकें। कुछ भू-राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पुतिन ने इवानोव की अत्यधिक राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को भांप लिया था और उन्हें डर था कि राष्ट्रपति बनने के बाद इवानोव सत्ता पर पूरी तरह अपनी पकड़ मजबूत कर सकते हैं, इसलिए उनकी उम्मीदवारी को खारिज कर दिया गया।

उत्तराधिकारी की रेस से बाहर होने के बाद भी इवानोव 2007 से 2011 तक उप-प्रधानमंत्री के तौर पर पुतिन की कैबिनेट में रहे और फिर 2011 से 2016 तक क्रेमलिन के चीफ ऑफ स्टाफ जैसी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। साल 2016 में उन्हें पर्यावरण संरक्षण और परिवहन के लिए राष्ट्रपति का विशेष दूत नियुक्त किया गया था, जिसे राजनीतिक विश्लेषकों ने उनका एक सम्मानजनक रिटायरमेंट माना। इवानोव ने इस साल की शुरुआत में ही इस पद को छोड़ा था। यूक्रेन में मॉस्को की सैन्य कार्रवाई के बाद रूस के अन्य शीर्ष अधिकारियों के साथ-साथ सर्गेई इवानोव पर भी अमेरिका और यूरोपीय संघ द्वारा कड़े आर्थिक व यात्रा प्रतिबंध लगाए गए थे।

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