US-Iran Peace Deal: स्विट्जरलैंड में होने वाला ऐतिहासिक शांति समारोह टला, ईरान ने पीछे खींचे कदम

अमेरिका और ईरान के बीच हुए कथित ‘इस्लामाबाद MoU’ के बाद स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक में प्रस्तावित सार्वजनिक शांति समारोह स्थगित कर दिया गया। रिपोर्टों के अनुसार, ईरान के भीतर बढ़ते राजनीतिक विरोध के चलते यह फैसला लिया गया, जबकि दोनों पक्षों के बीच तकनीकी वार्ता और युद्धविराम प्रक्रिया जारी रहेगी।

अमेरिका और ईरान के बीच ऐतिहासिक ‘इस्लामाबाद मेमोरैंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग’ (MoU) पर डिजिटल हस्ताक्षर होने के बाद, शुक्रवार 19 जून को स्विट्जरलैंड के खूबसूरत बर्गेनस्टॉक (Burgenstock) पहाड़ी रिजॉर्ट में होने वाला बहुप्रतीक्षित सार्वजनिक समारोह फिलहाल टाल दिया गया है। इस बड़े कूटनीतिक घटनाक्रम की आधिकारिक पुष्टि खुद स्विट्जरलैंड के विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर की है। दोनों महाशक्तियों के बीच दशकों पुराने टकराव को खत्म करने और 60 दिनों के युद्धविराम को जमीन पर उतारने के उद्देश्य से तय की गई इस आमने-सामने की बैठक से ऐन वक्त पर ईरान ने अपने कदम पीछे खींच लिए हैं।

अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थान ‘CNN-न्यूज18’ की एक खोजी रिपोर्ट के मुताबिक, इस भव्य सार्वजनिक समारोह में तेहरान (ईरान) की आधिकारिक मौजूदगी को लेकर खुद ईरान के भीतर ही कट्टरपंथी समूहों और संगठनों की तरफ से बेहद तीखा और आक्रामक विरोध शुरू हो गया था। इससे पहले, बुधवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने संघर्ष विराम से जुड़े 14-सूत्रीय प्रारंभिक मसौदे को अपनी मंजूरी दे दी थी, जिसके बाद अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबफ के डिजिटल हस्ताक्षरों के जरिए यह तत्काल प्रभाव से लागू भी हो गया था।

इस अचानक आए कूटनीतिक मोड़ के बाद अब ईरान का कोई भी वरिष्ठ राजनेता या अमेरिकी प्रशासन का कोई बड़ा अधिकारी स्विट्जरलैंड की यात्रा पर नहीं जा रहा है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, जो वार्ता का नेतृत्व करने के लिए उड़ान भरने वाले थे, उन्होंने भी अपना दौरा निरस्त कर दिया है। इसी के साथ, इस ऐतिहासिक शांति समझौते में अहम मध्यस्थ और गारंटर की भूमिका निभा रहे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को भी इस समारोह का हिस्सा बनने के लिए बर्न पहुंचना था, लेकिन ऐन मौके पर उनकी इस यात्रा को भी पूरी तरह रद्द कर दिया गया है।

अब यह ऐतिहासिक प्रक्रिया सार्वजनिक मंचों के बजाय सीधे तकनीकी और आंतरिक बातचीत के लंबे दौर में तब्दील हो जाएगी, जिसमें अमेरिका और ईरान के शीर्ष वार्ताकारों के साथ-साथ पर्दे के पीछे मध्यस्थता संभाल रहे पाकिस्तान और कतर के कूटनीतिज्ञ भी शामिल रहेंगे। स्विट्जरलैंड के विदेश मंत्रालय ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अपने बयान में कहा कि अमेरिका, ईरान, कतर और पाकिस्तान के बीच होने वाली शुरुआती तकनीकी बातचीत को फिलहाल स्थगित किया गया है, लेकिन स्विट्जरलैंड भविष्य में भी इस अहम शांति वार्ता की मेजबानी और मदद करने के लिए पूरी तरह तैयार है और बर्गेनस्टॉक रिजॉर्ट में इससे जुड़ी जरूरी तैयारियां आगे भी जारी रहेंगी।

ईरानी सेना के सबसे शक्तिशाली विंग ‘इस्लामिक रेवलूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ (IRGC) के एक सीनियर कमांडर के बेहद करीबी सूत्रों के हवाले से मीडिया रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि ईरान के भीतर इस बात को लेकर जबरदस्त अंदरूनी आक्रोश देखा जा रहा था कि क्या उनके शीर्ष अधिकारी सार्वजनिक रूप से अमेरिकी अधिकारियों से हाथ मिलाएंगे और अंतरराष्ट्रीय टीवी कैमरों के सामने एक साथ खड़े नजर आएंगे। ईरान के भीतर सुरक्षा के लिहाज से यह राजनीतिक जोखिम और ज्यादा संवेदनशील इसलिए हो गया क्योंकि यह पूरा शांति समारोह ऐसे समय में आयोजित किया जा रहा था, जब कुछ ही दिनों बाद ईरान अपने दिवंगत पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के राजकीय अंतिम संस्कार के कार्यक्रमों की घोषणा करने वाला है।

IRGC के सूत्रों का कहना है कि इतने संवेदनशील माहौल में वॉशिंगटन (अमेरिका) के साथ अचानक सार्वजनिक रूप से सुलह का प्रदर्शन करना देश के भीतर ईरानी नेतृत्व और सरकार के लिए राजनीतिक रूप से बेहद आत्मघाती और नुकसानदेह साबित हो सकता था। वर्तमान परिस्थितियों में देश की आम जनता और कट्टरपंथी समर्थकों के दिलों में युद्ध के दौरान मारे गए लोगों के लिए बदले की आग सुलग रही है। ऐसे में ईरानी और अमेरिकी अधिकारियों का एक ही मंच पर मुस्कुराते हुए साथ दिखना, संघर्ष में शहीद हुए देश के नागरिकों और सैनिकों के बलिदान के साथ एक बड़े ‘विश्वासघात’ के रूप में देखा जा सकता था।

देश के कट्टरपंथी गुटों ने सरकारी नेतृत्व को साफ शब्दों में आगाह किया था कि स्विट्जरलैंड का यह भव्य सार्वजनिक शो ईरान की आंतरिक राजनीति और स्थिरता के लिए एक बड़ा खतरा पैदा कर देगा। हालांकि, इस सार्वजनिक समारोह के टलने का मतलब यह कतई नहीं है कि शांति समझौता रद्द हो गया है। पूर्व में तय शर्तों के मुताबिक ‘इस्लामाबाद एमओयू’ पूरी तरह से लागू रहेगा और दोनों पक्ष आगे के परमाणु और वित्तीय मुद्दों को हल करने के लिए अगले 60 दिनों तक गुप्त तकनीकी वार्ता जारी रखेंगे, जिसे दोनों देशों की आपसी रजामंदी से आगे भी बढ़ाया जा सकता है।

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