पश्चिम एशिया में लंबे समय से जारी गंभीर सैन्य और राजनयिक तनाव को खत्म करने की दिशा में वैश्विक मंच पर एक बेहद ऐतिहासिक और चौंकाने वाली कामयाबी मिली है। अमेरिका और ईरान के बीच आखिरकार एक महत्वपूर्ण शांति समझौता हो गया है, जिसे मुख्य मध्यस्थ की भूमिका निभाने वाले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ‘इस्लामाबाद एमओयू’ (Islamabad MoU) नाम दिया है। इस बड़े और महत्वपूर्ण समझौते के लागू होते ही दुनिया के सबसे संवेदनशील और प्रमुख समुद्री ऊर्जा मार्ग ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ (Strait of Hormuz) को वाणिज्यिक जहाजों के लिए तुरंत खोलने का फैसला किया गया है। इसके बदले में अमेरिका भी ईरान के बंदरगाहों पर लगाई गई अपनी नौसैनिक नाकेबंदी (Naval Blockade) को तत्काल प्रभाव से हटा रहा है, जिससे वैश्विक बाजार और अर्थव्यवस्था को एक बहुत बड़ी राहत मिली है।
इस पूरे शांति समझौते की रूपरेखा तैयार करने में पड़ोसी देश पाकिस्तान ने मुख्य मध्यस्थ और गारंटर की भूमिका निभाई है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस समझौते की आधिकारिक घोषणा करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खोमेनेई की सराहना की है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के शीर्ष कूटनीतिक नेतृत्व ने सूझबूझ और दृढ़ प्रतिबद्धता दिखाते हुए अंततः शांति के रास्ते को चुना है, जिससे एक बड़े वैश्विक आर्थिक संकट और युद्ध की स्थिति को टालने में मदद मिली है। इसके साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा और चौंकाने वाला बयान देते हुए यहां तक कहा कि ईरान के पास भी अपनी सुरक्षा के लिए बैलिस्टिक मिसाइलें होनी चाहिए, क्योंकि अन्य देशों के पास भी ये मौजूद हैं। ट्रंप का यह रुख सुरक्षा मामलों के जानकारों के लिए काफी अप्रत्याशित माना जा रहा है।
I am honoured to announce that the historic ‘Islamabad Memorandum of Understanding’ has been electronically signed today between the United States of America and the Islamic Republic of Iran. The Memorandum has been signed by honourable Presidents of both the countries and also…
— Shehbaz Sharif (@CMShehbaz) June 18, 2026
इस ऐतिहासिक 14-सूत्रीय समझौते की पटकथा बीते कुछ दिनों से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार लिखी जा रही थी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस में आयोजित जी-7 (G7) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के बाद, वहां के ऐतिहासिक वेर्साय पैलेस (Palace of Versailles) में फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ डिनर के दौरान डिजिटल माध्यम से इस समझौता ज्ञापन (MoU) पर अपने हस्ताक्षर किए। इसके तुरंत बाद ईरानी मीडिया ने भी तेहरान से राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान की तस्वीरें जारी कीं, जिसमें वे कैमरे के सामने हस्ताक्षरित दस्तावेज की कॉपी हाथ में लिए नजर आ रहे थे। वेर्साय पैलेस कूटनीति के इतिहास में बड़े और युगांतरकारी समझौतों के लिए जाना जाता है, इसलिए इस स्थान पर हस्ताक्षर होना कूटनीतिक रूप से बेहद प्रतीकात्मक है।
पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर इस ऐतिहासिक घटनाक्रम की पूरी जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के राष्ट्रपतियों द्वारा इस ‘इस्लामाबाद एमओयू’ पर इलेक्ट्रॉनिक तरीके से डिजिटल दस्तखत किए जा चुके हैं और यह समझौता तत्काल प्रभाव से पूरी दुनिया में लागू हो गया है। इस समझौते के क्रियान्वयन को आगे बढ़ाने, तकनीकी पहलुओं पर चर्चा करने और इसके 60 दिनों के फ्रेमवर्क को अंतिम रूप देने के लिए दोनों देशों के उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल स्विट्जरलैंड के बर्गनस्टॉक में एक अहम बैठक करने जा रहे हैं। इस कार्यान्वयन प्रक्रिया और सीधी वार्ता की शुरुआत के लिए अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (JD Vance) और ईरानी दल का नेतृत्व वहां के संसदीय अध्यक्ष मोहम्मद बगेर गालिबफ करेंगे, जिसमें मध्यस्थ के तौर पर पाकिस्तान और कतर भी शामिल रहेंगे।
