NEET Re-Exam: नीट री-एग्जाम से 3 दिन पहले अहमदाबाद में 17 साल के छात्र ने की आत्महत्या, जांच में जुटी पुलिस

मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट (NEET) के आगामी 21 जून को होने वाले री-एग्जाम से पहले देश में छात्रों के बीच बढ़ते मानसिक तनाव और आत्महत्या के मामलों ने एक बार फिर सबको झकझोर कर रख दिया है।

Death
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अहमदाबाद: 21 जून को होने वाले NEET री-एग्जाम से पहले छात्रों की आत्महत्या के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। तमिलनाडु के कोयंबटूर की 19 वर्षीय छात्रा अनुकीर्तना की मौत के बाद अब गुजरात के अहमदाबाद से भी एक दुखद मामला सामने आया है। यहां 17 वर्षीय एक छात्र ने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली। घटना परीक्षा से महज तीन दिन पहले हुई, जिससे छात्र समुदाय और अभिभावकों के बीच चिंता बढ़ गई है।

पुलिस के अनुसार, छात्र अहमदाबाद के न्यू रानीप इलाके की एक रिहायशी सोसाइटी में रहता था। गुरुवार तड़के कंट्रोल रूम को सूचना मिली कि सोसाइटी परिसर में एक किशोर गंभीर रूप से घायल अवस्था में पड़ा है। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

मृतक छात्र के परिजनों ने बताया कि उसने NEET की पहली परीक्षा दी थी और उसका पेपर काफी अच्छा गया था। वह आगामी री-एग्जाम की तैयारी भी कर रहा था। परिवार के मुताबिक उसने कभी किसी तरह के मानसिक दबाव या तनाव की बात नहीं की थी।

मामले की जांच कर रहे पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आत्महत्या के पीछे की वजह अभी स्पष्ट नहीं है। पुलिस छात्र के माता-पिता, दोस्तों और परिचितों से पूछताछ कर रही है ताकि घटना के कारणों का पता लगाया जा सके। फिलहाल मौके से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है।

अहमदाबाद पुलिस के एसीपी राणा दिग्विजयसिंह ने कहा कि मामले के हर पहलू की जांच की जाएगी। परिवार इस समय गहरे सदमे में है, इसलिए उनके बयान बाद में दर्ज किए जाएंगे। पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया जाएगा।

गौरतलब है कि हाल के दिनों में NEET परीक्षा से जुड़े तनाव के बीच कई छात्रों की आत्महत्या की घटनाएं सामने आई हैं। लखनऊ की शिवानी, सीकर के उमेश, झुंझुनूं के प्रदीप माहिच और कोयंबटूर की अनुकीर्तना जैसे मामलों में परीक्षा के दबाव को संभावित कारण बताया गया था। हालांकि अहमदाबाद के इस मामले में अब तक ऐसी कोई पुष्टि नहीं हुई है और पुलिस सभी संभावित कारणों की जांच कर रही है।

लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं ने प्रतियोगी परीक्षाओं के दबाव, छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और परीक्षा प्रणाली को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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