Maharashtra Politics: स्थापना दिवस से पहले उद्धव ठाकरे को बड़ा झटका! शिवसेना (UBT) के 6 सांसद बगावत की तैयारी में; 2 पहुंचे दिल्ली

Maharashtra Political Crisis: महाराष्ट्र की सियासत में एक बार फिर बड़ा राजनीतिक उलटफेर होने के संकेत मिल रहे हैं। ममता बनर्जी के बाद अब उद्धव ठाकरे के सामने भी मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं।

शिवसेना UBT में टूट की आहट, 9 में से 6 सांसद छोड़ सकते हैं साथ
शिवसेना UBT में टूट की आहट, 9 में से 6 सांसद छोड़ सकते हैं साथ

पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी को लगे चुनावी झटके के बाद अब महाराष्ट्र की सियासत से एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है, जो शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे की मुश्किलें बढ़ा सकती है। महाराष्ट्र के राजनीतिक गलियारों में चल रही चर्चाओं के मुताबिक, उद्धव गुट के 9 लोकसभा सांसदों में से 6 सांसद बगावत का मन बना चुके हैं। यदि यह सियासी पटकथा हकीकत में तब्दील होती है, तो आगामी 19 जून को पार्टी के 60वें स्थापना दिवस से ठीक पहले उद्धव ठाकरे को अब तक का दूसरा सबसे बड़ा राजनीतिक झटका लग सकता है।

दो सांसद चार्टर्ड प्लेन से पहुंचे दिल्ली, शिंदे गुट में विलय की तैयारी!

इस संभावित बगावत की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उद्धव गुट के दो प्रमुख सांसद अचानक दिल्ली पहुंच चुके हैं। मंगलवार देर रात सामने आई रिपोर्ट्स के अनुसार, परभणी से सांसद संजय उर्फ ​​बंधु जाधव और यवतमाल-वाशिम से सांसद संजय देशमुख एक चार्टर्ड प्लेन के जरिए गुपचुप तरीके से दिल्ली के लिए रवाना हुए। राजनीतिक हलकों में दावा किया जा रहा है कि उद्धव गुट से नाराज चल रहे ये छह बागी सांसद पहले लोकसभा में अपना एक अलग गुट बनाएंगे और उसके बाद आधिकारिक तौर पर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली मूल ‘शिवसेना’ में अपना विलय कर लेंगे।

डैमेज कंट्रोल में जुटे संजय राउत और अनिल देसाई

पार्टी में होने वाली इस संभावित ऐतिहासिक टूट को समय रहते रोकने और नाराज सांसदों को मनाने के लिए उद्धव ठाकरे खेमे ने भी अपनी कोशिशें तेज कर दी हैं। डैमेज कंट्रोल के तहत शिवसेना (UBT) के वरिष्ठ नेता व सांसद संजय राउत और अनिल देसाई भी तुरंत दिल्ली पहुंच चुके हैं। माना जा रहा है कि 19 जून को शिवसेना के स्थापना दिवस के ऐतिहासिक मौके पर महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की तरफ से उद्धव ठाकरे को यह बड़ा राजनीतिक सरप्राइज दिया जा सकता है। उल्लेखनीय है कि वर्तमान में 7 लोकसभा सांसदों के साथ शिंदे गुट केंद्र में भाजपा की तीसरी सबसे बड़ी सहयोगी पार्टी है, जबकि उद्धव गुट (UBT) के पास 9 लोकसभा सांसद हैं।

‘ऑपरेशन टाइगर’ की चर्चा और मातोश्री की बैठक में सन्नाटा

महाराष्ट्र की राजनीति में पिछले कुछ दिनों से ‘ऑपरेशन टाइगर’ को लेकर कयासों का बाजार गर्म है। चर्चा थी कि इस गुप्त ऑपरेशन के तहत उद्धव गुट के कई सांसद पाला बदलकर एकनाथ शिंदे के खेमे में शामिल हो सकते हैं। हालांकि, मुख्यमंत्री शिंदे ने सार्वजनिक तौर पर इन दावों को खारिज करते हुए कहा था कि चुनाव अब समाप्त हो चुके हैं और फिलहाल उन्हें किसी भी तरह के ‘नंबर गेम’ या जोड़-तोड़ की आवश्यकता नहीं है।

लेकिन इस विवाद ने तब और तूल पकड़ लिया जब उद्धव ठाकरे ने मुंबई स्थित अपने आवास ‘मातोश्री’ पर पार्टी के सभी 9 सांसदों की एक आपातकालीन बैठक बुलाई। हैरान करने वाली बात यह रही कि इस अहम बैठक में आमने-सामने केवल 4 सांसद ही उपस्थित हुए, जिनमें अरविंद सावंत, अनिल देसाई, राजाभाऊ वाजे और संजय दीना पाटील शामिल थे। सांसद ओमराजे निंबालकर इस बैठक से पूरी तरह नदारद रहे, जबकि दावों के अनुसार संजय देशमुख और नागेश पाटील केवल ऑनलाइन माध्यम से ही इस बैठक में जुड़ पाए थे।

‘जिसे जाना हो खुशी से जाए’ – उद्धव ठाकरे

बैठक में सांसदों की कम उपस्थिति और बगावत की आहट को भांपते हुए भावुक और सख्त लहजे में उद्धव ठाकरे ने कहा, “जिसे जाना हो, वह खुशी-खुशी जा सकता है। आज भले ही समय मेरा नहीं है, लेकिन कल जरूर मेरा होगा। तब तक हमें धीरज रखना होगा और हर परिस्थिति को सहना होगा। जो लोग आज आदरणीय बालासाहेब ठाकरे की असली विचारधारा वाली शिवसेना को छोड़कर जा रहे हैं, वे भविष्य में अंततः बहुत पछताएंगे, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी होगी।”

अगर अटकलें सच हुईं, तो 4 साल में होगी दूसरी सबसे बड़ी टूट

यदि ये राजनीतिक कयास सही साबित होते हैं, तो पिछले चार वर्षों के भीतर उद्धव ठाकरे के लिए यह दूसरा सबसे बड़ा और असहनीय झटका होगा। इससे पहले जून 2022 में तत्कालीन कद्दावर नेता एकनाथ शिंदे ने पार्टी के खिलाफ ऐतिहासिक बगावत का बिगुल फूंका था, जिसके बाद शिवसेना के 55 विधायकों में से 40 विधायक उद्धव गुट से अलग हो गए थे। बाद में कुछ और विधायकों के जुड़ने से यह संख्या 50 के पार पहुंच गई थी। उसी भारी संख्या बल के आधार पर चुनाव आयोग ने भी ‘शिवसेना’ नाम और उसका पारंपरिक आधिकारिक चुनाव चिह्न ‘धनुष-बाण’ एकनाथ शिंदे के गुट को आवंटित कर दिया था। अब देखना दिलचस्प होगा कि 19 जून से पहले महाराष्ट्र की यह राजनीतिक करवट क्या नया मोड़ लेती है।

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