नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच समझौते की खबर के बाद सोमवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट देखने को मिली। इसी बीच केंद्र सरकार ने डीजल और विमान ईंधन (एटीएफ) के निर्यात पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स में बढ़ोतरी कर दी है, जबकि पेट्रोल पर लागू टैक्स में कोई बदलाव नहीं किया गया है। वित्त मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार नई दरें 16 जून से लागू हो गई हैं और 30 जून तक प्रभावी रहेंगी। वहीं, घरेलू उपभोक्ताओं के लिए पेट्रोल और डीजल पर मौजूदा शुल्क संरचना में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है।
नई व्यवस्था के तहत डीजल के निर्यात पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (SAED) बढ़ाकर 14 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है, जो पहले 13.5 रुपये प्रति लीटर था। इसी तरह विमान ईंधन (ATF) के निर्यात पर एसएईडी 9.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 12.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। हालांकि पेट्रोल के निर्यात पर लगने वाला शुल्क 1.5 रुपये प्रति लीटर ही बना रहेगा।
क्यों बढ़ाया गया विंडफॉल टैक्स?
सरकार ने पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और वैश्विक आपूर्ति संबंधी अनिश्चितताओं के दौरान देश में ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने के लिए विंडफॉल टैक्स लागू किया था। सरकार ने 26 मार्च को डीजल और एटीएफ के निर्यात पर शुल्क लगाया था और उसके बाद हर दो सप्ताह में इसकी समीक्षा करते हुए दरों में बदलाव किया जाता रहा है। बाद में 16 मई को पेट्रोल के निर्यात पर भी शुल्क लागू किया गया था।
सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि निर्यातक अंतरराष्ट्रीय और घरेलू कीमतों के बीच अंतर का अनुचित लाभ न उठा सकें और देश के भीतर ईंधन की आपूर्ति प्रभावित न हो।
कच्चे तेल की कीमतों में नरमी
28 फरवरी को ईरान से जुड़े संघर्ष के बाद वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला था। हालांकि अब अमेरिका और ईरान के बीच समझौते की खबरों के बाद बाजार में राहत का माहौल बना है, जिससे तेल की कीमतों पर दबाव कम हुआ है।
सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। हालांकि मंगलवार को कारोबार के दौरान इसमें हल्की तेजी देखने को मिली। ब्रेंट क्रूड 0.23 प्रतिशत की बढ़त के साथ 83.36 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। वहीं इंडियन बास्केट की कीमत 6.89 प्रतिशत गिरकर 86.77 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में स्थिति सामान्य बनी रहती है और ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित नहीं होती है, तो आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में और स्थिरता देखने को मिल सकती है। वहीं सरकार भी वैश्विक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए निर्यात शुल्क की नियमित समीक्षा करती रहेगी।
