कोलकाता: अभिषेक बनर्जी पर हुए हमले के बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी बेहद गुस्से में हैं। राज्य की सत्ता जाते ही तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) विधायक दल में टूट का बड़ा खतरा मंडराने लगा है। हालात ऐसे बन चुके हैं कि विधानसभा में जल्द ही दो टीएमसी यानी ‘तृणमूल कांग्रेस’ और ‘असली तृणमूल’ नजर आ सकती है।
कोलकाता के एमएलए हॉस्टल में बागी नेता ऋतब्रत बनर्जी और संदीपान साहा से मिलने वाले विधायकों की एक लंबी लिस्ट सामने आई है, जिनमें मालदा-मुर्शिदाबाद के विधायक शामिल थे। इस बगावत का असर साफ देखने को मिल रहा है, क्योंकि ममता बनर्जी द्वारा बुलाई गई बैठक से भी 80 में से 60 विधायक गायब रहे। दूसरी तरफ, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष शामिक भट्टाचार्य ने अपनी पार्टी में टीएमसी नेताओं की एंट्री बंद करने की घोषणा की है।
बंगाल में बीजेपी की शुभेंदु अधिकारी की सरकार बनने के साथ ही टीएमसी में बिखराव के बीज अंकुरित हो गए थे। हारने वाले उम्मीदवारों और कई नेताओं ने अभिषेक बनर्जी के चुनावी डायलॉग और कार्यशैली को हार के लिए जिम्मेदार ठहराया। 19 मई को ममता बनर्जी द्वारा बुलाई गई समीक्षा बैठक में भी नेताओं ने अभिषेक बनर्जी को लेकर कड़े सवाल किए। इस दौरान ऋतब्रत बनर्जी ने फाल्टा में जहांगीर खान और अभिषेक के रिश्ते पर टिप्पणी की, लेकिन ममता बनर्जी की तरफ से इन सवालों का कोई जवाब नहीं आया।
विवाद तब और बढ़ गया जब ऋतब्रत बनर्जी और संदीपान साहा ने स्पीकर को चिट्ठी लिखकर दावा किया कि टीएमसी की ओर से भेजे गए लेटर में उनके दस्तखत जाली थे। इसके बाद ममता बनर्जी ने दोनों को पार्टी से बाहर कर दिया। इस कार्रवाई के बाद टीएमसी विधायकों का एक अलग गुट सक्रिय हो गया और नतीजा यह हुआ कि विधायक दल की मीटिंग से 60 विधायक नदारद रहे।
टीएमसी से निलंबित नेता रिजू दत्ता ने दावा किया है कि टीएमसी के लगभग 50 विधायक विधानसभा स्पीकर के पास जाएंगे और तीन मुख्य मुद्दे उठाएंगे। सबसे पहले बागी विधायक दल में दो-तिहाई बहुमत होने और असली तृणमूल होने का दावा पेश करेंगे। दूसरा दावा यह होगा कि चूंकि 50 विधायकों वाला गुट ही असली तृणमूल कांग्रेस है, इसलिए विपक्ष के नेता ऋतब्रत बंदोपाध्याय होंगे, न कि शोभनदेव चट्टोपाध्याय। इसके साथ ही बागी विधायक चुनाव चिन्ह पर भी दावा पेश करेंगे, क्योंकि उनके पास दो-तिहाई बहुमत है।
रिजू दत्ता का कहना है कि बंगाल में अभी शिवसेना का महाराष्ट्र मॉडल लागू है। उन्होंने कहा कि चुनाव में हार की जिम्मेदारी अभिषेक बनर्जी को लेनी होगी। जिन लोगों को अभिषेक बनर्जी हाथ पकड़कर टीएमसी में लाए थे, उन सभी ने पार्टी की पीठ में छुरा घोंपा है और इसकी जिम्मेदारी तृणमूल कांग्रेस की नेता ममता बनर्जी को भी लेनी होगी।
अगर बागी नेता ऋतब्रत बनर्जी के बारे में बात करें तो उन्होंने वाम संगठन एसएफआई से छात्र राजनीति शुरू की थी और फिर साल 2020 में वह टीएमसी से जुड़ गए। इसके बाद वह टीएमसी ट्रेड यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष बने। साल 2014 में उन्हें राज्यसभा के लिए चुना गया था और 2024 में वह दूसरी बार राज्यसभा सांसद बने। इसके बाद 2026 के विधानसभा चुनाव में वह उलूबेरिया पूरबा से जीतकर विधायक बने। फिलहाल उन्होंने टीएमसी में पूरी तरह से बगावत का झंडा बुलंद कर रखा है।
