इजरायल और ईरान के बीच जारी तनाव और लेबनान में बढ़ते सैन्य संघर्ष के बीच अब एक बड़ा राजनीतिक मोड़ सामने आया है। जहां पहले जंग रुकने की बातचीत चल रही थी, वहीं इजरायल की लेबनान में सैन्य कार्रवाई के बाद स्थिति फिर बिगड़ गई थी। ईरान ने अमेरिका से बातचीत रोकने का संकेत दिया और होर्मुज खाड़ी बंद करने की धमकी भी दी थी।
हालांकि अब सामने आए नए घटनाक्रम में दावा किया गया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुद कूटनीतिक मोर्चा संभालते हुए स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की है। बताया गया है कि ट्रंप ने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से बातचीत कर बेरूत की ओर बढ़ रही इजरायली सेना को वापस बुलवाया।
इसके साथ ही यह भी दावा किया गया है कि ट्रंप के प्रतिनिधियों ने सीधे हिज्बुल्लाह से बातचीत की, जिसके बाद हिज्बुल्लाह ने यह सहमति जताई कि वह अब इजरायल पर हमला नहीं करेगा और इजरायल भी उस पर कार्रवाई नहीं करेगा। इस समझौते के बाद फिलहाल गोलीबारी रुकने की उम्मीद जताई जा रही है, हालांकि पूर्ण शांति की दिशा अभी लंबी मानी जा रही है।
"Let’s see how long that lasts — Hopefully it will be for ETERNITY!" – President Donald J. Trump pic.twitter.com/XHNdprD98E
— The White House (@WhiteHouse) June 1, 2026
इस पूरे घटनाक्रम के बीच ट्रंप ने यह भी कहा है कि ईरान के साथ बातचीत जारी है, जबकि पहले तनाव मुख्य रूप से ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर बताया गया था और दोनों देशों के बीच मध्यस्थों के जरिए बातचीत चल रही थी।
दूसरी ओर लेबनान में इजरायल और हिज्बुल्लाह के बीच जारी संघर्ष भी इस संकट का बड़ा हिस्सा रहा है। हिज्बुल्लाह को ईरान समर्थित संगठन बताया गया है, जो दक्षिणी लेबनान में सक्रिय है और इजरायल उसे बड़ा खतरा मानता है।
इजरायल द्वारा लेबनान में सैन्य घुसपैठ और ब्यूफोर्ट किले पर कब्जे के बाद तनाव और बढ़ गया था। इजरायली पक्ष का कहना था कि वह हिज्बुल्लाह के हमलों का जवाब दे रहा है, जबकि लेबनान के प्रधानमंत्री नवाफ सलाम ने इजरायल पर तबाही और शहरों को नुकसान पहुंचाने के आरोप लगाए थे।
जानकारी के अनुसार, लेबनान में भारी मानवीय नुकसान भी हुआ है, जिसमें हजारों लोगों की मौत और लाखों लोगों के विस्थापन की स्थिति बताई गई है। वहीं, इजरायल के भी सैनिकों और नागरिकों के हताहत होने की बात सामने आई है।
पहले अप्रैल में अमेरिका की मध्यस्थता से संघर्षविराम की कोशिश की गई थी, लेकिन वह स्थायी नहीं रह सका। बाद में वॉशिंगटन में इजरायल और लेबनान के बीच सीधी बातचीत भी शुरू हुई, लेकिन हिज्बुल्लाह ने हथियार छोड़ने से इनकार कर दिया और प्रक्रिया को जटिल बना दिया।
फिलहाल ताजा दावों के अनुसार, गोलीबारी रोकने पर सहमति बनने की बात कही जा रही है, लेकिन क्षेत्र में स्थायी शांति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
