US Iran Conflict: ईरान ने अमेरिका के साथ संभावित परमाणु समझौते को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए साफ कर दिया है कि वह केवल वादों के आधार पर किसी भी समझौते को मंजूरी नहीं देगा। ईरान के मुख्य वार्ताकार और संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर गालिबाफ ने कहा है कि जब तक ईरान के अधिकारों और हितों की पूरी तरह रक्षा सुनिश्चित नहीं हो जाती, तब तक किसी भी समझौते को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब महीनों से चल रही कूटनीतिक बातचीत गतिरोध का सामना कर रही है। हालिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेहरान को एक संशोधित प्रस्ताव भेजा है, जिसमें पहले की तुलना में अधिक कड़ी शर्तें शामिल हैं।
दोबारा संसद अध्यक्ष के रूप में शपथ लेने के बाद आयोजित एक वर्चुअल सत्र में गालिबाफ ने कहा कि तेहरान केवल आश्वासनों पर आगे नहीं बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि ईरान को अमेरिकी वादों पर भरोसा नहीं है और किसी भी समझौते से पहले ठोस परिणाम दिखाई देने चाहिए।
गालिबाफ ने कहा कि “दुश्मन के शब्दों और वादों पर कोई भरोसा नहीं है। हमारा एकमात्र पैमाना यह है कि हम अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करने से पहले ठोस नतीजे हासिल करें। जब तक हमें यह पूरा विश्वास नहीं हो जाता कि ईरानी लोगों के अधिकारों की रक्षा की गई है, तब तक किसी भी समझौते को मंजूरी नहीं दी जाएगी।”
इधर, अमेरिकी मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार ट्रंप प्रशासन ने हाल ही में ईरान को एक नया संशोधित प्रस्ताव भेजा है। हालांकि प्रस्ताव की पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन कहा जा रहा है कि वॉशिंगटन किसी भी अंतिम समझौते से पहले तेहरान से अधिक मजबूत प्रतिबद्धताओं की मांग कर रहा है।
इससे पहले रविवार को राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया था कि अमेरिका और ईरान एक “बहुत अच्छे समझौते” के करीब पहुंच चुके हैं। उन्होंने कहा कि ईरान उनकी सबसे महत्वपूर्ण शर्त स्वीकार कर चुका है और परमाणु हथियार नहीं रखने पर सहमत है। हालांकि ट्रंप ने यह भी चेतावनी दी कि यदि बातचीत विफल होती है तो अमेरिका दूसरे विकल्पों पर विचार करेगा।
ईरान के ताजा बयान से स्पष्ट है कि दोनों देशों के बीच वार्ता अभी भी कई अहम मुद्दों पर अटकी हुई है और किसी अंतिम समझौते तक पहुंचने के लिए दोनों पक्षों को महत्वपूर्ण मतभेद दूर करने होंगे।
