Turkey On Indian Missiles: तुर्की में भारतीय मिसाइलों का खौफ! दिग्गज डिफेंस एक्सपर्ट की चेतावनी- साइप्रस के रास्ते घेराबंदी कर रहा भारत

Turkey India relations: ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान को तुर्की की ओर से मिले समर्थन के बाद भारत और तुर्की के रिश्तों में तनाव लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है। इसी बीच तुर्की के रक्षा विशेषज्ञों ने दावा किया है कि भारत, ग्रीस और साइप्रस के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करते हुए पूर्वी भूमध्यसागर क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा सकता है।

India Turkey Tensions: ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान की सैन्य मदद करने वाले तुर्की की घेराबंदी भारत ने तेजी के साथ शुरू कर दी है। पिछले एक साल में भारत ने कई ऐसे कदम उठाए हैं जिससे साफ पता चलता है कि तुर्की को सैन्य स्तर पर जैसे को तैसा जवाब देना है। इस बीच तुर्की के दिग्गज डिफेंस एनालिस्ट ने चेतावनी दी है कि भारत, पूर्वी भूमध्यसागर में मिसाइलों की तैनाती करने वाला है, जिससे तुर्की की सुरक्षा को गंभीर खतरा पैदा हो सकता है। तुर्की के विश्लेषकों ने साइप्रस के रास्ते भारत से मिसाइलें खरीदने की ग्रीस की संभावित कोशिश के प्रति अपने देश को आगाह किया है।

तुर्की के मिलिट्री एक्सपर्ट ने आशंका जताई है कि ग्रीस सीधे तौर पर भारतीय हथियार खरीदने के बजाय साइप्रस गणराज्य के रास्ते परोक्ष रूप से भारत की एडवांस मिसाइल प्रणालियां हासिल करने की योजना बना रहा है। वहीं, तुर्की के राष्ट्रवादी सैन्य एक्सपर्ट रऊफ कोसे ने बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए कहा है कि तुर्की को किसी अचानक हमले का शिकार होने के बजाय सही समय पर खुद ही पहले युद्ध शुरू कर देना चाहिए। उनका कहना है कि तुर्की को पूर्वी भूमध्य सागर में कभी भी कोई रियायत नहीं देनी चाहिए।

भारतीय हथियारों का तुर्की में दिख रहा खौफ

पाकिस्तान भले ही अपनी पीठ ठोक रहा हो, लेकिन ऑपरेशन सिंदूर में तुर्की के सैन्य अधिकारी इस्लामाबाद में ही मौजूद थे। उन्होंने भारतीय मिसाइलों की विनाशक क्षमता देखी है, इसीलिए उन्हें पता है कि ब्रह्मोस मिसाइल को तुर्की के डिफेंस सिस्टम किसी भी हाल में रोक नहीं पाएंगे। तुर्की के अधिकारी भारतीय हथियारों की घातक क्षमता से पूरी तरह वाकिफ हैं। वे यह भी जान चुके हैं कि भारत के स्वदेशी एयर डिफेंस सिस्टम ने कैसे तुर्की के बायरकतार ड्रोनों को मार गिराया। इसी वजह से भारत की क्षमता से उनका डर स्वाभाविक है।

तुर्की की प्रतिष्ठित सुरक्षा रणनीति और रक्षा उद्योग से जुड़ी पत्रिका ‘M5’ के एडिटर इन चीफ और रक्षा विशेषज्ञ आरदान जेंटुर्क के मुताबिक, नई दिल्ली और एथेंस (ग्रीस) के बीच बढ़ रही रणनीतिक साझेदारी पर तुर्की बारीकी से नजर रख रहा है। भारत के बढ़ते रक्षा निर्यात पोर्टफोलियो से जुड़ी रिपोर्टों के बाद यह चिंता और भी बढ़ गई है। इस पोर्टफोलियो में ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल और हाल ही में विकसित लॉन्ग-रेंज लैंड अटैक क्रूज मिसाइल (LR-LACM) शामिल हैं। जेंटुर्क को 1990 के दशक में हुए काराबाख युद्ध, बोस्निया युद्ध और कोसोवो युद्ध के दौरान ग्राउंड जीरो पर रहकर रिपोर्टिंग करने का लंबा अनुभव है, इसलिए उनकी रिपोर्ट्स को काफी गंभीरता से लिया जाता है।

साइप्रस के रास्ते तैनाती की तैयारी

सैन्य एक्सपर्ट आरदान जेंटुर्क ने बताया कि ग्रीस और साइप्रस एक जॉइंट डिफेंस डॉक्ट्रिन का पालन करते हैं। ग्रीस को सीधे तौर पर भारतीय हथियार खरीदने में कई तरह की कानूनी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है और उसे तुर्की के साथ सीधे सैन्य टकराव भड़कने का खतरा महसूस हो सकता है। इसीलिए, एजियन सागर में लंबी दूरी की मारक क्षमता वाली मिसाइलों की सीधे तैनाती करने के बजाय ग्रीस, साइप्रस के रास्ते ऐसा करने की तैयारी में है।

विश्लेषक आरदान जेंटुर्क ने कहा कि ग्रीक-साइप्रस प्रशासन की तरफ से भारत की LR-LACM जैसी अत्यधिक सटीक, कम ऊंचाई पर उड़ने वाली क्रूज मिसाइलों या ब्रह्मोस जैसी सुपरसोनिक सिस्टम को हासिल करना पूर्वी भूमध्य सागर और मुख्य तुर्की में मौजूद तुर्की की रणनीतिक संपत्तियों के लिए एक सीधा खतरा है। तुर्की के रक्षा हलकों को आशंका है कि भारतीय मिसाइलें इतनी ज्यादा खतरनाक हैं कि वे बहुत आसानी से तुर्की के रूसी एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम को भेद सकती हैं।

तुर्की के विश्लेषकों ने भूमध्य सागर में भारत की इस नीति को आक्रामक कहा है और इसे तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन की कश्मीर नीति तथा अलग-अलग अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान का खुला समर्थन करने के जवाब से जोड़ा है। हालांकि, इस संभावित डील को लेकर अभी तक भारत, साइप्रस या ग्रीस में से किसी ने भी आधिकारिक तौर पर कुछ भी नहीं कहा है।

Related Posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

© 2026 Breaking News Wale - Latest Hindi News by Breaking News Wale