Chandranath Rath Murder Case: पश्चिम बंगाल से बलिया तक जुड़ा मर्डर का कनेक्शन; वारदात में इस्तेमाल कार और दूसरी गिरफ्तारी से चौंकाने वाला खुलासा

Chandranath Rath Murder Case: पश्चिम बंगाल के कथित राजनीतिक तनाव और चुनावी माहौल के बीच शुभेंदु अधिकारी के पीए हत्याकांड मामले में रोज नए खुलासे सामने आ रहे हैं। जांच एजेंसियों की पड़ताल में अब एक नया तथ्य सामने आया है, जिसमें पता चला है कि वारदात में इस्तेमाल की गई निशान माइक्रा कार का संबंध उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से जुड़ा है।

Chandranath Rath Murder Case: पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के निजी सहायक (पीए) चंद्रनाथ रथ हत्याकांड की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, इसमें हर दिन नए और चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की तफ्तीश में अब इस हाई-प्रोफाइल मामले के तार उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से गहराई से जुड़ते नजर आ रहे हैं। इस हत्याकांड में इस्तेमाल की गई ‘निसान माइक्रा’ कार और गिरफ्तार आरोपियों के बलिया कनेक्शन ने इस पूरे मामले को और पेचीदा बना दिया है।

इस मामले में सबसे नया खुलासा वारदात में इस्तेमाल की गई निसान माइक्रा कार को लेकर हुआ है, जो बलिया की निकली। जांच में सामने आया है कि बलिया के बांसडीहरोड थाना क्षेत्र के दवनी निवासी ज्ञानेंद्र सिंह उर्फ मुन्नू ने यह कार इसी इलाके के रहने वाले जितेंद्र सिंह से महज पचास हजार रुपये में खरीदी थी। कार बेचने वाले जितेंद्र सिंह को इस बात की भनक तब लगी जब सीबीआई की टीम पूछताछ के लिए उनके घर पहुंची। जितेंद्र ने बताया कि उन्होंने खुद यह कार अक्टूबर के महीने में छठ पर्व के आसपास हुसैनबाद के रहने वाले एक तिवारी जी से पैंतीस हजार रुपये में ली थी, और बाद में बीते एक मई को इसे ज्ञानेंद्र सिंह को बेच दिया। हालांकि, जितेंद्र ने अभी तक गाड़ी के कागजात अपने नाम ट्रांसफर नहीं करवाए थे और उन्हें कार का नंबर भी याद नहीं है। इस खरीद-फरोख्त में सबसे दिलचस्प बात यह रही कि जिस मध्यस्थ (बिचौलिए) ने जितेंद्र को गाड़ी दिलवाई थी, उसी ने बाद में इसे बिकवाने में भी मदद की।

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री के सहयोगी चंद्रनाथ रथ की हत्या छह मई को पश्चिम बंगाल के मध्यमग्राम में गोली मारकर कर दी गई थी, जो कि राज्य विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के ठीक दो दिन बाद की घटना है। इस हत्याकांड के सिलसिले में सीबीआई ने सोमवार को मुजफ्फरनगर से बलिया के रसड़ा कोतवाली क्षेत्र के रतोपुर गांव निवासी 25 वर्षीय राज कुमार सिंह को गिरफ्तार किया है। स्थानीय पुलिस के अनुसार, राज कुमार का बलिया में पहले से ही आपराधिक रिकॉर्ड रहा है और उसके खिलाफ रसड़ा थाने में दो और गड़वार थाने में एक मामला दर्ज है, जिनमें से दो मामलों में पुलिस आरोप पत्र (चार्जशीट) भी दाखिल कर चुकी है।

पुलिस क्षेत्राधिकारी (सीओ) आलोक गुप्ता ने राज कुमार के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि वह पहले मुंबई में ओएनजीसी (ONGC) में नौकरी करता था। वहां से लौटने के बाद वह गांव में ड्राइवर का काम करने लगा था और विदेश जाने की फिराक में था, लेकिन आपराधिक मुकदमों की वजह से उसका पासपोर्ट नहीं बन सका। पुलिस रिकॉर्ड में वह कोई बड़ा अपराधी नहीं बल्कि मनमौजी किस्म का युवक है जो स्थानीय स्तर पर मारपीट के मामलों में शामिल रहा है। राज कुमार के पिता त्रिभुवन नारायण सिंह ने बताया कि सीबीआई ने उन्हें मुजफ्फरनगर से बेटे की गिरफ्तारी की सूचना फोन पर दी थी, जिसके बाद टीम ने गांव आकर पूछताछ की और मोबाइल भी चेक किया। पिता का कहना है कि उनका बेटा बीए प्रथम वर्ष पास है और उन्हें इस बात की कोई जानकारी नहीं है कि वह कभी पश्चिम बंगाल गया था या नहीं, क्योंकि वहां उनकी कोई रिश्तेदारी भी नहीं है।

बलिया जिले से इस हत्याकांड में यह दूसरी बड़ी गिरफ्तारी है। इससे पहले सीबीआई बलिया कोतवाली क्षेत्र के आनंद नगर निवासी राज सिंह को भी गिरफ्तार कर चुकी है, जो चिलकहर ब्लॉक से ब्लॉक प्रमुख का चुनाव लड़ने की तैयारी में जुटा था। खास बात यह है कि हाल ही में गिरफ्तार हुए राज कुमार का गांव भी इसी चिलकहर ब्लॉक के पास स्थित है। बलिया से लगातार हो रही इन गिरफ्तारियों और कार के कनेक्शन ने स्थानीय स्तर पर भी राजनीतिक और सामाजिक हलचल तेज कर दी है।

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