सोमनाथ: गुजरात के प्रसिद्ध और ऐतिहासिक सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में ‘सोमनाथ अमृत महोत्सव’ का भव्य आयोजन किया गया। इस गौरवशाली अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंदिर में दर्शन-पूजन किया और जनसभा को संबोधित करते हुए इसे भारत की आजादी की भावना और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक बताया।
प्राचीन गरिमा की वापसी का संदेश
प्रधानमंत्री ने इतिहास के पन्नों को पलटते हुए कहा कि 1947 में भारत राजनीतिक रूप से स्वतंत्र हुआ था, लेकिन 1951 में सोमनाथ मंदिर की ‘प्राण प्रतिष्ठा’ ने पूरी दुनिया को भारत की असली आजादी का संदेश दिया था। उन्होंने जोर देकर कहा कि सोमनाथ का पुनर्निर्माण कोई साधारण घटना नहीं थी, बल्कि इस बात का ऐलान था कि भारत अपनी प्राचीन गरिमा को वापस पाने की राह पर चल पड़ा है।
Speaking at the Somnath Amrut Mahotsav. The Somnath Temple stands as a beacon of unwavering faith, divinity and a sacred symbol of India’s eternal soul. https://t.co/otO2YOCCUL
— Narendra Modi (@narendramodi) May 11, 2026
सरदार पटेल का संकल्प
सरदार वल्लभभाई पटेल को याद करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि आधुनिक भारत को एकजुट करने वाले लौह पुरुष ने ही सोमनाथ के पुनर्निर्माण का संकल्प लिया था। उन्होंने बताया कि जिस तरह सरदार साहब ने 500 से ज्यादा रियासतों को एक किया, उसी तरह सोमनाथ मंदिर के जरिए उन्होंने दुनिया को दिखाया कि भारत अपनी विरासत पर गर्व करना जानता है।
भगवान शिव की महिमा का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री भावुक दिखे। उन्होंने कहा, “दादा सोमनाथ के अनन्य भक्त के रूप में मैं न जाने कितनी बार यहां नतमस्तक हुआ हूं। आज देवाधिदेव महादेव की विग्रह प्रतिष्ठा के 75 साल मनाना एक सुखद अनुभूति है।”
सोमनाथ की भव्य और दिव्य पावन धरा पर महादेव के चरणों में महापूजा और कुंभाभिषेक का परम सौभाग्य प्राप्त करना जीवन के अत्यंत भावपूर्ण और अविस्मरणीय क्षणों में से एक है। ईश्वर रूपी जनता जनार्दन का स्मरण करते हुए महादेव के दर्शन और पूजन का यह अलौकिक अवसर, हृदय को अनंत आध्यात्मिक ऊर्जा,… pic.twitter.com/SDmJcisPYo
— Narendra Modi (@narendramodi) May 11, 2026
पोखरण और अटल जी की इच्छाशक्ति का जिक्र
11 मई का दिन राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस के रूप में भी मनाया जाता है। इस संदर्भ में पीएम मोदी ने 1998 के पोखरण परमाणु परीक्षण को याद किया। उन्होंने कहा कि उस समय अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में भारत ने दुनिया के तमाम प्रतिबंधों और दबावों की परवाह किए बिना अपनी वैज्ञानिक क्षमता और राजनीतिक इच्छाशक्ति का लोहा मनवाया था।
प्रधानमंत्री ने कहा, “दुनिया की कोई ताकत भारत को झुका नहीं सकती। पोखरण परीक्षण को ‘ऑपरेशन शक्ति’ नाम दिया गया था क्योंकि शिव के साथ शक्ति की आराधना ही हमारी परंपरा है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि उस समय दुनिया भले ही भारत पर टूट पड़ी थी, लेकिन 13 मई को दो और परीक्षण कर भारत ने दिखा दिया कि उसकी इच्छाशक्ति अटल है।
