Bihar Bridge Crisis: बिहार के भागलपुर को कोसी, सीमांचल और पूर्वोत्तर राज्यों से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण विक्रमशिला सेतु रविवार देर रात एक बड़े हादसे का शिकार हो गया। पुल के पाया नंबर 133 का स्लैब अचानक टूटकर गंगा नदी में गिर गया, जिससे इस व्यस्त मार्ग पर आवागमन पूरी तरह ठप हो गया है। गनीमत रही कि हादसे के वक्त उस विशेष हिस्से पर कोई वाहन मौजूद नहीं था, वरना बड़ी जान-माल की हानि हो सकती थी। घटना के तुरंत बाद प्रशासन ने सुरक्षा के लिहाज से पुल पर यातायात को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया है।
यह हादसा उस समय हुआ है जब विभाग इस 4.7 किलोमीटर लंबे पुल की मरम्मत की तैयारियों में जुटा हुआ था। हाल ही में पथ निर्माण विभाग की ओर से लगभग 12 करोड़ रुपये का एक प्रस्ताव (प्राक्कलन) तैयार कर मुख्यालय भेजा गया था। विभाग की मंशा थी कि मानसून की शुरुआत से पहले पुल का मेंटेनेंस कार्य पूरा कर लिया जाए। खुद विभाग के सचिव पंकज कुमार पाल ने टीम के साथ पुल का निरीक्षण कर मरम्मत कार्य को जल्द शुरू करने के निर्देश दिए थे, लेकिन कागजी प्रक्रियाओं और प्रशासनिक स्वीकृति के बीच पुल की जर्जर संरचना ने जवाब दे दिया।
पुल के रखरखाव को लेकर गंभीर लापरवाही की बातें भी सामने आ रही हैं। आंकड़ों के मुताबिक, साल 2016 के बाद इस पुल की कोई ठोस मरम्मत नहीं की गई थी। उस समय मुंबई की एक एजेंसी को जिम्मेदारी दी गई थी, लेकिन 2021 के बाद से यह काम बंद हो गया। पिछले चार वर्षों के दौरान मेंटेनेंस के नाम पर केवल सतही काम जैसे सड़कों की सफाई और लाइटें बदलने तक ही सीमित रहा। पुल के सबसे महत्वपूर्ण हिस्सों जैसे बियरिंग, एक्सपेंशन ज्वाइंट और कार्बन प्लेटों की मजबूती पर कोई ध्यान नहीं दिया गया, जिससे यह ढांचा कमजोर होता चला गया।
स्लैब गिरने की इस घटना ने अब विभाग की मुश्किलों को और बढ़ा दिया है। कार्यपालक अभियंता साकेत कुमार के अनुसार, अब पुराने प्राक्कलन का कोई औचित्य नहीं रह गया है क्योंकि पुल का एक बड़ा हिस्सा ध्वस्त हो चुका है। अब नए सिरे से विस्तृत तकनीकी जांच की जाएगी और मरम्मत के लिए फिर से नया प्रस्ताव तैयार होगा। इस बीच, पुल बंद होने से भागलपुर और गंगा पार के जिलों के बीच संपर्क कट गया है, जिससे हजारों यात्रियों और मालवाहक वाहनों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
