Assam Assembly Election Result 2026: असम विधानसभा चुनाव 2026 के मतगणना रुझानों ने पूर्वोत्तर की राजनीति में एक नया इतिहास रच दिया है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन ने 126 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत का जादुई आंकड़ा पार कर लिया है। राज्य में लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी कर भाजपा ने यह साबित कर दिया है कि जनता का भरोसा विकास और क्षेत्रीय पहचान के मुद्दों पर अडिग है। दूसरी ओर, कांग्रेस और उसके सहयोगियों का ‘महागठबंधन’ (एएसएम) सत्ता के गलियारों से दूर होता नजर आ रहा है।
इस बार असम के मतदाताओं ने रिकॉर्ड 85.96% मतदान कर लोकतंत्र के प्रति अपना गहरा विश्वास प्रकट किया था। चुनाव के दौरान राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी), नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) और बांग्लादेशी घुसपैठ जैसे संवेदनशील मुद्दों पर तीखी बहस देखने को मिली। जानकारों का मानना है कि 2023 में लागू किए गए नए परिसीमन ने भी चुनावी समीकरणों को एनडीए के पक्ष में मोड़ने में बड़ी भूमिका निभाई है। बाढ़ और बेरोजगारी जैसी चुनौतियों के बावजूद, भाजपा का हिंदुत्व और स्वदेशी पहचान का नैरेटिव विपक्षी दलों के दावों पर भारी पड़ा।
भाजपा के 31-सूत्रीय ‘संकल्प पत्र’ को भी इस जीत का मुख्य आधार माना जा रहा है। पार्टी ने सत्ता में आने के तीन महीने के भीतर समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने और ‘जमीन जिहाद’ के खिलाफ सख्त कानून बनाने का जो वादा किया था, उसे जनता ने हाथों-हाथ लिया। साथ ही, आर्थिक मोर्चे पर राज्य की जीएसडीपी को 7.41 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाने का ट्रैक रिकॉर्ड और ‘ओरुनोदोई योजना’ के माध्यम से महिलाओं को मिलने वाली प्रत्यक्ष आर्थिक सहायता ने भाजपा के पक्ष में एक मजबूत ‘साइलेंट वोटर’ वर्ग तैयार किया।
चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस ने मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी पर विदेश में संपत्ति रखने के गंभीर आरोप लगाए थे। हालांकि, मुख्यमंत्री ने इन दस्तावेजों को एआई (AI) और फोटोशॉप के जरिए तैयार की गई एक विदेशी साजिश करार दिया। इस विवाद का असर उल्टा हुआ और विपक्षी दलों के आरोपों के मुकाबले सरमा को जनता की सहानुभूति मिली, जो अब रुझानों में स्पष्ट बढ़त के रूप में दिखाई दे रही है। मुख्यमंत्री खुद अपनी पारंपरिक जालुकबारी सीट से रिकॉर्ड मतों से आगे चल रहे हैं, जबकि कांग्रेस के प्रमुख नेता गौरव गोगोई जोरहाट सीट पर कड़े संघर्ष में फंसे हुए हैं।
असम में एनडीए की यह हैट्रिक केवल एक राज्य की जीत नहीं है, बल्कि पूरे पूर्वोत्तर भारत में भाजपा के वैचारिक दबदबे की पुष्टि है। एजीपी और बीपीएफ जैसे क्षेत्रीय दलों के साथ भाजपा का तालमेल सफल रहा, जबकि बदरुद्दीन अजमल की एआईयूडीएफ के अलग लड़ने से विपक्षी वोटों का बिखराव हुआ। इस ऐतिहासिक जनादेश के साथ हिमंत बिस्वा सरमा न केवल असम, बल्कि समूचे पूर्वोत्तर के सबसे ताकतवर और निर्विवाद नेता के रूप में उभरकर सामने आए हैं। आने वाले दिनों में अवैध घुसपैठ और यूसीसी जैसे मुद्दों पर सरकार के कड़े फैसलों पर देश भर की निगाहें टिकी रहेंगी।
