अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव अब उस मोड़ पर पहुंच गया है, जहां से वापसी का रास्ता केवल युद्ध या पूर्ण आत्मसमर्पण ही नजर आता है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर ‘तूफान आने वाला है’ लिखकर वैश्विक हलचल पैदा कर दी है। ट्रंप का यह संकेत ईरान के खिलाफ एक बड़े सैन्य ऑपरेशन की आहट माना जा रहा है। 30 अप्रैल की यह तारीख इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि आज व्हाइट हाउस में ट्रंप अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के साथ उस ‘फाइनल फॉर्मूले’ पर मुहर लगा सकते हैं, जो खाड़ी क्षेत्र में दशकों से चले आ रहे इस संघर्ष का अंत कर सकता है।
सेंटकॉम का ‘स्मार्ट स्ट्राइक’ प्लान और ट्रंप की शर्तें
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने ईरान की सैन्य कमर तोड़ने के लिए एक बेहद सटीक और घातक योजना तैयार की है। सूत्रों के मुताबिक, इस प्लान का मुख्य उद्देश्य ईरान के परमाणु ठिकानों (विशेषकर इस्फ़हान) से संवर्धित यूरेनियम को हटाना और उनकी बची-कुची वायुसेना व नौसेना को नेस्तनाबूद करना है। ट्रंप का रुख साफ है—वे बातचीत के लिए फोन पर उपलब्ध तो हैं, लेकिन परमाणु हथियारों के मुद्दे पर कोई समझौता करने को तैयार नहीं हैं।

‘स्ट्रेट ऑफ ट्रंप’ और कच्चे तेल का संकट
ट्रंप ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को अब ‘स्ट्रेट ऑफ ट्रंप’ का नाम देते हुए वहां 100% अचूक नाकाबंदी का दावा किया है। अमेरिकी नौसेना ने इस जलडमरूमध्य में 25 युद्धपोत और 200 से अधिक लड़ाकू विमान तैनात कर दिए हैं। इस सख्त नाकेबंदी का सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ा है। कच्चे तेल की कीमतें आसमान छूते हुए 126 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गई हैं, जिससे दुनिया भर में महंगाई का खतरा बढ़ गया है। हालांकि, करीब 10 महीने से तैनात युद्धपोत ‘USS Gerald R. Ford’ के मरम्मत के लिए वापस लौटने की खबरों ने खाड़ी में अमेरिकी पकड़ पर सवाल भी खड़े किए हैं।
ईरान का पलटवार और ‘बूचड़खाने’ की चेतावनी
दूसरी तरफ, ईरान ने अमेरिका के इन दावों को मनोवैज्ञानिक युद्ध करार दिया है। ईरान के सुप्रीम लीडर के सलाहकार मोहसिन रेजई ने चेतावनी दी है कि ट्रंप ने अमेरिकी सेना को फारस की खाड़ी के उस ‘बूचड़खाने’ में धकेल दिया है, जहां से निकलना नामुमकिन होगा। ईरान अपनी सड़कों पर ‘शाहेद 136’ ड्रोन और लंबी दूरी की मिसाइलों का प्रदर्शन कर अपनी ताकत दिखा रहा है। राजनयिक मोर्चे पर भी ईरान सक्रिय है, लेकिन पाकिस्तान और ओमान के जरिए बातचीत की कोशिशें फिलहाल ट्रंप की सख्त शर्तों के आगे नाकाम साबित हो रही हैं।
इजरायल-हिज्बुल्लाह सीमा पर सीजफायर की धज्जियां
ईरान के साथ जारी इस तनातनी के बीच लेबनान सीमा पर भी हालात बेकाबू हो रहे हैं। इजरायल और हिज्बुल्लाह के बीच सीजफायर के दावों के बावजूद ताजा गोलाबारी और हमले शुरू हो गए हैं। इजरायली डिफेंस फोर्सेज (IDF) और हिज्बुल्लाह के लड़ाके एक बार फिर आमने-सामने हैं। अगर ईरान पर अमेरिका की ओर से कोई भी छोटा हमला होता है, तो लेबनान और इजरायल के बीच यह चिंगारी एक भीषण क्षेत्रीय युद्ध की आग में बदल सकती है। फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें व्हाइट हाउस और सेंटकॉम की आज होने वाली बैठक पर टिकी हैं।
