पुतिन से मुलाकात के बाद ईरान के तेवर कड़े: अब्बास अराघची ने अमेरिका को बताया ‘कमजोर’, ट्रंप पर कसा तंज

रूस और ईरान के बीच बढ़ती रणनीतिक नजदीकी ने मध्य पूर्व (Middle East) के समीकरणों को पूरी तरह बदल दिया है। मॉस्को में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची की मुलाकात के बाद ईरान के तेवर अब पहले से कहीं ज्यादा आक्रामक नजर आ रहे हैं।

Putin and Araghchi Meeting: रूस और ईरान के बीच बढ़ती कूटनीतिक नजदीकी के बीच तेहरान के तेवर और अधिक आक्रामक दिखाई दे रहे हैं। मॉस्को में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात के बाद ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका पर तीखा हमला बोला है। उनके हालिया बयान को क्षेत्रीय राजनीति और वैश्विक शक्ति संतुलन के नजरिए से अहम माना जा रहा है।

रूस के सेंट पीटर्सबर्ग में हुई उच्चस्तरीय बैठक के दौरान अराघची ने ईरान को एक स्थिर, मजबूत और प्रभावशाली राष्ट्र बताया। उन्होंने कहा कि हालिया संघर्षों ने दुनिया को ईरान की वास्तविक शक्ति का एहसास कराया है। ईरानी विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि इस्लामी गणराज्य ईरान एक मजबूत व्यवस्था है, जिसे दबाव से झुकाया नहीं जा सकता।

अराघची ने मुश्किल समय में रूस के समर्थन की सराहना करते हुए कहा कि मॉस्को और तेहरान अपनी रणनीतिक साझेदारी को अब नए स्तर पर ले जाएंगे। इस बयान को पश्चिमी देशों के लिए स्पष्ट संदेश के रूप में देखा जा रहा है कि ईरान खुद को अंतरराष्ट्रीय मंच पर अलग-थलग नहीं मानता।

अमेरिका पर निशाना साधते हुए अराघची ने कहा कि वॉशिंगटन अपने किसी भी उद्देश्य में सफल नहीं हो सका। उन्होंने तंज भरे अंदाज में कहा कि इसी वजह से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अब बातचीत का रास्ता तलाश रहे हैं। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब ट्रंप लगातार दावा कर रहे हैं कि ईरान वार्ता के लिए इच्छुक है।

ईरान ने अमेरिकी दावों को पलटते हुए इसे अमेरिका की कमजोरी के तौर पर पेश करने की कोशिश की है। तेहरान का कहना है कि यदि बातचीत की चर्चा हो रही है, तो यह अमेरिकी रणनीति की विफलता का परिणाम है।

इस घटनाक्रम का असर खाड़ी क्षेत्र में भी देखा जा रहा है। रूस-ईरान नजदीकी और ईरान के कड़े रुख से अरब देशों में चिंता बढ़ी है। रिपोर्टों के अनुसार, कई खाड़ी देश इस तनावपूर्ण माहौल में कोई बड़ा कदम उठाने से बच रहे हैं।

इसी बीच संयुक्त अरब अमीरात के वरिष्ठ अधिकारी अनवर गर्गश ने गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल के देशों के राजनीतिक और सैन्य रुख पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने इसे ऐतिहासिक रूप से कमजोर स्थिति बताया।

विशेषज्ञों का मानना है कि रूस और ईरान की बढ़ती साझेदारी आने वाले समय में पश्चिम एशिया की राजनीति को और जटिल बना सकती है, जबकि अमेरिका, इजरायल और खाड़ी देशों के लिए नई रणनीतिक चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं।

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