मॉनसून 2026 पर अल-नीनो का साया: देश के कई हिस्सों में सूखे का खतरा, स्काईमेट ने जारी की चेतावनी

स्काईमेट वेदर के अनुसार, इस साल देश में कुल बारिश लंबी अवधि के औसत (LPA) का महज 94 फीसदी रहने की संभावना है। जून से सितंबर के दौरान सामान्य तौर पर होने वाली 868.6 मिलीमीटर बारिश के मुकाबले इस बार केवल 816 मिलीमीटर बारिश होने का अनुमान है।

Monsoon 2026 Warning: भारत के लिए वर्ष 2026 का मॉनसून कई मायनों में चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है। मौसम विशेषज्ञों के ताजा पूर्वानुमानों ने देश की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि इस बार मॉनसून के कमजोर रहने की आशंका जताई जा रही है। इसका सीधा असर न केवल खेती-किसानी पर पड़ेगा, बल्कि करोड़ों किसानों की आजीविका भी प्रभावित हो सकती है।

निजी मौसम एजेंसी Skymet Weather के अनुसार, इस साल देश में कुल मॉनसून वर्षा लंबी अवधि के औसत (LPA) का लगभग 94% रह सकती है। सामान्य तौर पर जून से सितंबर के बीच भारत में औसतन 868.6 मिमी बारिश होती है, लेकिन इस बार यह घटकर करीब 816 मिमी तक सिमट सकती है। यह कमी भले ही आंकड़ों में मामूली लगे, लेकिन इसका व्यापक प्रभाव देखने को मिल सकता है।

सूखे का खतरा और घटती बारिश

पूर्वानुमान के अनुसार, 40% संभावना है कि बारिश 90-95% LPA के बीच रहेगी, जबकि 30% संभावना इस बात की भी है कि यह 90% से नीचे चली जाए, जिससे सूखे जैसी स्थिति बन सकती है। सामान्य या उससे अधिक बारिश की संभावना बेहद कम बताई गई है।

एल-नीनो बनेगा सबसे बड़ा कारण

इस संभावित संकट की सबसे बड़ी वजह El Niño की वापसी मानी जा रही है। लंबे समय तक ला-नीना के प्रभाव के बाद अब प्रशांत महासागर में बदलाव हो रहा है, जिससे एल-नीनो की स्थिति बनने लगी है। विशेषज्ञों का कहना है कि इसका असर खासतौर पर मॉनसून के दूसरे हिस्से में ज्यादा दिखाई देगा, जब बारिश अनियमित और कमजोर हो सकती है।

क्या कहता है मौसम विभाग?

India Meteorological Department (IMD) ने भी संकेत दिए हैं कि जून के बाद एल-नीनो के सक्रिय होने की संभावना बढ़ सकती है। हालांकि, जून महीने में बारिश सामान्य या थोड़ी बेहतर रह सकती है, लेकिन जुलाई से सितंबर के बीच इसमें गिरावट आने की आशंका है।

महीनेवार बारिश का अनुमान

  • जून: 101% (सामान्य से थोड़ा अधिक)
  • जुलाई: 95%
  • अगस्त: 92%
  • सितंबर: 89%

यानी सीजन के आगे बढ़ने के साथ बारिश में लगातार कमी आ सकती है।

कहां ज्यादा और कहां कम होगी बारिश?

इस बार बारिश का वितरण भी असमान रहने की संभावना है। पूर्वी राज्यों—बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा—में अच्छी बारिश हो सकती है, जबकि उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में कमी रहने के आसार हैं।

अर्थव्यवस्था पर असर

भारत में करीब 51% खेती मॉनसून पर निर्भर है और लगभग 47% आबादी की आजीविका कृषि से जुड़ी हुई है। ऐसे में कम बारिश से फसलों पर असर पड़ेगा, ग्रामीण मांग घट सकती है और खाद्य पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है।

कुल मिलाकर, मॉनसून 2026 भारत के लिए एक बड़ी परीक्षा साबित हो सकता है। अगर एल-नीनो का असर बढ़ता है, तो देश को सूखे, महंगाई और कृषि संकट जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

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