ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई का बड़ा बयान, अमेरिका-इजरायल को बताया ‘बेरहम दुश्मन’

US-Israel-Iran War: अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी जंग को 34 दिन हो चुके हैं। इसी बीच ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने अमेरिका और इजरायल को ‘बेरहम दुश्मन’ करार देते हुए उन पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

तेहरान: अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी भीषण युद्ध के 34वें दिन ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने एक पत्र के जरिए अपना पक्ष रखते हुए दुश्मन देशों पर तीखा हमला बोला है। ‘इस्लामिक रिपब्लिक डे’ के अवसर पर जारी इस संदेश में खामेनेई ने अमेरिका और इजरायल को ‘बेरहम’ करार देते हुए आरोप लगाया कि ये दोनों देश इंसानियत और नैतिकता की तमाम हदें पार कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि इन शत्रुओं के लिए मानवीय जीवन का कोई मूल्य नहीं है।

सुप्रीम लीडर ने अपने पत्र में विशेष रूप से ‘शजरेह तैयबा स्कूल’ पर हुए हमले की कड़े शब्दों में निंदा की है। तेहरान प्रशासन का दावा है कि युद्ध के पहले ही दिन अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों में इस स्कूल को निशाना बनाया गया था, जिसमें बच्चों और शिक्षकों सहित 175 से अधिक निर्दोष लोगों की जान चली गई थी। इसके साथ ही ईरान में मनाए गए ‘नेचर डे’ का जिक्र करते हुए खामेनेई ने देशवासियों में उम्मीद जगाने की कोशिश की और कहा कि अल्लाह की मर्जी से ईरान की धरती पर बोए गए उम्मीद के बीज भविष्य में फल देने वाले पेड़ बनेंगे।

युद्ध के बीच अपनी भविष्य की रणनीति स्पष्ट करते हुए खामेनेई ने ऐलान किया है कि ईरान मध्य-पूर्व में इजरायल विरोधी ताकतों को अपना समर्थन देना जारी रखेगा। लेबनानी समूह हिजबुल्लाह को लिखे एक अलग पत्र में उन्होंने स्पष्ट किया कि शहीद नेताओं के नक्श-ए-कदम पर चलते हुए इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान की नीति में कोई बदलाव नहीं होगा और इजरायल-अमेरिका के खिलाफ जारी प्रतिरोध को पूरा सहयोग मिलता रहेगा। यह बयान ऐसे समय में आया है जब क्षेत्र में तनाव चरम पर है और युद्ध थमने के कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं।

हालांकि, सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई की वर्तमान स्थिति को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सस्पेंस बना हुआ है। 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद से उन्हें सार्वजनिक रूप से नहीं देखा गया है। अमेरिकी और इजरायली खुफिया अधिकारियों का अनुमान है कि खामेनेई शुरुआती हमलों में घायल हुए थे और फिलहाल किसी अज्ञात सुरक्षित स्थान पर छिपे हुए हैं। उनके सभी संदेश अब तक केवल पत्रों के रूप में ही सामने आए हैं, जिन्हें ईरानी टीवी चैनलों पर पढ़कर सुनाया जा रहा है। गौरतलब है कि ‘इस्लामिक रिपब्लिक डे’ ईरान के इतिहास में 1979 की क्रांति के बाद हुए उस जनमत संग्रह की याद में मनाया जाता है, जिसने ईरान को आधिकारिक तौर पर एक इस्लामिक गणराज्य घोषित किया था।

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