वॉशिंगटन: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक तरफ ईरान के साथ कूटनीतिक बातचीत पर जोर दे रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ मध्य पूर्व में अमेरिकी सैनिकों की मौजूदगी तेजी से बढ़ाने की तैयारी कर रहे हैं। अमेरिकी रक्षा विभाग 10,000 अतिरिक्त जमीनी सैनिक तैनात करने पर विचार कर रहा है। यह बल 82वीं एयरबोर्न डिवीजन के अतिरिक्त होगा, जिसे पहले से ही इस क्षेत्र में तैनात करने का आदेश दिया गया है।
10000 अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती होने पर कम से कम 17 हजार अमेरिकी सैनिक मध्य पूर्व भेजे जाएंगे। यह पहले से मौजूद 40–50 हजार सैनिकों के अतिरिक्त हैं। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि इन अतिरिक्त सैनिकों को कहां तैनात किया जाएगा। वाइट हाउस की डेप्युटी प्रेस सेक्रेटरी अन्ना केली ने कहा कि सेना की तैनाती से जुड़ी सभी घोषणाएं युद्ध विभाग की ओर से ही की जाएंगी।
इस बीच, अमेरिकी सेना 82वीं एयरबोर्न डिवीजन से कम से कम 1,000 और सैनिक तैनात करने की तैयारी कर रही है, ताकि क्षेत्र में पहले से मौजूद करीब 50,000 सैनिकों को और बल मिल सके। इसके अलावा, पेंटागन दो मरीन एक्सपेडिशनरी यूनिट की तैनाती की प्रक्रिया में है, जिसके तहत लगभग 5,000 मरीन और नौसेना के हजारों अन्य कर्मी भी क्षेत्र में भेजे जाएंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप की यह रणनीति भविष्य में संभावित कदमों के लिए विकल्प बनाए रखने की कोशिश है। 82वीं एयरबोर्न डिवीजन का मुख्य निशाना फारस की खाड़ी में स्थित खर्ग द्वीप और अन्य रणनीतिक क्षेत्र हैं, जहां से ईरान अपने तेल का लगभग 90 प्रतिशत निर्यात करता है।
राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर कहा कि ईरानी नेताओं को बातचीत जल्द शुरू करनी चाहिए, क्योंकि देर होने पर पीछे लौटने का कोई रास्ता नहीं होगा। उन्होंने यह पोस्ट उस बयान के एक दिन बाद की, जिसमें कहा गया था कि अमेरिका और ईरान के बीच समझौते के करीब बातचीत चल रही है। ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका द्वारा प्रस्तावित 15 सूत्री युद्धविराम योजना को ईरान ने अस्वीकार करने के बाद अब तेहरान ‘‘हमसे समझौता करने की भीख मांग रहा है।’’
