दुबई/तेहरान: युद्ध की आग में झुलस रहे मिडिल ईस्ट के सामने अब प्रकृति ने एक नई और गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है। क्षेत्र में एक शक्तिशाली और असामान्य मौसम प्रणाली (Weather System) दस्तक दे रही है, जिसका असर आज बुधवार से ही दिखना शुरू हो सकता है। मौसम वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि अगले 48 से 72 घंटों में संयुक्त अरब अमीरात (UAE), दक्षिणी ईरान, पूर्वी इराक और सऊदी अरब के कुछ हिस्सों में विनाशकारी बारिश और बाढ़ आ सकती है। यह स्थिति ऐसे समय में बन रही है जब सामरिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पहले से ही युद्ध के कारण तनाव का केंद्र बना हुआ है।
रेगिस्तान में ‘सदी का सबसे बड़ा’ जल प्रलय?
आमतौर पर सूखे और गर्म मौसम के लिए पहचाने जाने वाले खाड़ी देशों में इस बार कुदरत का अलग ही रूप देखने को मिल रहा है। विभिन्न वेदर मॉडल्स के अनुसार, अगले तीन दिनों में कुछ इलाकों में 100 मिमी से लेकर 500 मिमी तक बारिश हो सकती है। कई शहरों के लिए यह आंकड़ा उनके साल भर के औसत से भी कहीं अधिक है। इस तूफान का चरम (Peak) गुरुवार और शुक्रवार को रहने की संभावना है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, मिस्र और सऊदी अरब के ऊपर बने गहरे ट्रफ और इटली की ओर से आ रहे शक्तिशाली वेदर पैटर्न की टक्कर इस तबाही की मुख्य वजह है।
दुबई और अबू धाबी खतरे के केंद्र में
पर्यटन और व्यापार के वैश्विक केंद्र दुबई पर इस तूफान का सबसे ज्यादा खतरा मंडरा रहा है। दुबई में साल भर में औसतन 100 मिमी बारिश होती है, लेकिन अनुमान है कि महज 24 से 48 घंटों के भीतर वहां 76 से 152 मिमी तक पानी बरस सकता है। इसके अलावा, शारजाह और अबू धाबी में भी भारी जलजमाव और तेज हवाओं की चेतावनी दी गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस सिस्टम के कारण रेगिस्तानी इलाकों में दुर्लभ टॉरनेडो (बवंडर), ओलावृष्टि और धूल भरी आंधी भी देखने को मिल सकती है। इससे पहले अप्रैल 2024 में यूएई ने 75 साल की सबसे भारी बारिश झेली थी, जिसने पूरे शहर को ठप कर दिया था।
जंग और व्यापार पर संकट के बादल
मिडिल ईस्ट में जारी सैन्य संघर्ष के बीच यह प्राकृतिक आपदा ‘डबल संकट’ बनकर उभरी है। विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य, जहाँ से दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल गुजरता है, वहां पहले से ही टैंकरों की आवाजाही प्रभावित है। यदि तूफान के कारण बंदरगाहों और समुद्री रास्तों में बाधा आती है, तो वैश्विक तेल आपूर्ति (Global Oil Supply) और कीमतों पर इसका सीधा और बड़ा असर पड़ सकता है। युद्ध के कारण पहले से ही दबाव झेल रही सप्लाई चेन के लिए यह मौसम एक बड़ा झटका साबित हो सकता है।
हाई अलर्ट पर खाड़ी देश
खतरे को देखते हुए खाड़ी देशों की सरकारों ने अपनी इमरजेंसी सेवाओं को हाई अलर्ट पर रखा है। नागरिकों को घरों में रहने और तटीय इलाकों से दूर रहने की सलाह दी गई है। जलवायु परिवर्तन और तेजी से हो रहे शहरीकरण को विशेषज्ञ इन ‘सदी में एक बार’ आने वाले तूफानों के बार-बार आने की बड़ी वजह मान रहे हैं। अगले 72 घंटे पूरे मिडिल ईस्ट के लिए बेहद निर्णायक होने वाले हैं, जहाँ अब इंसान और कुदरत दोनों से एक साथ मुकाबला करना पड़ रहा है।
