ईरान और अमेरिका के बीच जारी भीषण युद्ध के 25वें दिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। ट्रंप ने पहली बार उन परिस्थितियों और व्यक्तियों का नाम सार्वजनिक किया है, जिन्होंने उन्हें ईरान पर हमला करने के लिए प्रेरित किया। मीडिया से बातचीत के दौरान ट्रंप ने स्पष्ट किया कि इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के उकसावे वाली खबरें महज अटकलें थीं; असल में अमेरिकी रक्षा मंत्री (वॉर सेक्रेटरी) पीट हेगसेथ वह पहले व्यक्ति थे जिन्होंने ईरान के खिलाफ युद्ध का बिगुल फूंकने की सलाह दी थी।
परमाणु हथियार रोकने के लिए लिया बड़ा फैसला
ट्रंप ने बताया कि उन्होंने अपने मंत्रिमंडल के दिग्गजों और जनरलों के साथ ईरान को लेकर अपनी गंभीर चिंताओं पर चर्चा की थी। ट्रंप के अनुसार, ईरान पिछले 47 वर्षों से आतंक फैला रहा है और वह परमाणु हथियार बनाने के बेहद करीब पहुंच चुका था। ट्रंप ने कहा, “मैंने पीट हेगसेथ और जनरल केन सहित अपने कई महान रणनीतिकारों को फोन किया और उनसे कहा कि मिडिल-ईस्ट में हमारे सामने एक बड़ी समस्या है। मैंने उनसे पूछा कि क्या हमें रुकना चाहिए या इस समस्या को हमेशा के लिए खत्म कर देना चाहिए?” राष्ट्रपति ने पीट हेगसेथ की प्रशंसा करते हुए कहा कि पीट ने ही सबसे पहले आवाज उठाई और कहा कि हमें हमला करना चाहिए क्योंकि हम उन्हें परमाणु हथियार बनाने की अनुमति नहीं दे सकते।
28 फरवरी का वह हमला जिसने बदल दिया मिडिल-ईस्ट
गौरतलब है कि अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी 2026 को संयुक्त रूप से ईरान पर भीषण बमबारी शुरू की थी। इस सैन्य कार्रवाई के शुरुआती दौर में ही ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की खबर सामने आई थी, जिसने पूरी दुनिया को स्तब्ध कर दिया था। अब युद्ध को 25 दिन बीत चुके हैं और ट्रंप के अनुसार, अमेरिका ने ईरान के शीर्ष नेतृत्व को लगभग खत्म कर दिया है। ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि अब ईरान के साथ उनकी “बहुत अच्छी बातचीत” शुरू हो गई है, जो पिछले दो दिनों से जारी है।
शांति की ओर बढ़ते कदम या नई रणनीति?
ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है जब उन्होंने हाल ही में ईरान के ऊर्जा संयंत्रों पर हमले के प्लान को 5 दिनों के लिए टालने की घोषणा की है। राष्ट्रपति ने विश्वास जताया कि पीट हेगसेथ और अन्य सैन्य अधिकारियों के सुझावों पर अमल करने के बाद अब अमेरिका और ईरान के बीच मध्य पूर्व की इस पुरानी शत्रुता के पूर्ण समाधान की संभावना बढ़ गई है। हालांकि, ईरान के कई दिग्गज नेताओं को खोने के बाद तेहरान का अगला रुख क्या होगा, इस पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं।
