ईरान-इजरायल युद्ध के बीच कश्मीर की ‘मानवता’ देख भावुक हुआ ईरानी दूतावास, भारत की मदद के लिए जताया आभार

US-Israel-Iran War: अमेरिका और इजरायल के साथ जारी संघर्ष के 24 दिन बाद ईरान को भारी नुकसान का सामना करना पड़ा है। इस बीच ईरानी दूतावास ने भारत के लोगों द्वारा दी जा रही मानवीय सहायता और समर्थन के लिए आभार जताया है।

श्रीनगर: अमेरिका और इजरायल के साथ जारी भीषण संघर्ष के 24वें दिन, ईरान को हुए व्यापक नुकसान के बीच भारत से मिल रही मानवीय सहायता ने कूटनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक भावुक संदेश जारी कर उन भारतीयों के प्रति आभार व्यक्त किया है, जो ईरान के पुनर्निर्माण के लिए अपनी जमा-पूंजी और गहने दान कर रहे हैं। दूतावास ने लिखा, “हम आपकी दयालुता और मानवता को कभी नहीं भूलेंगे। धन्यवाद, भारत।”

दरअसल, इस साल ईद के मौके पर कश्मीर घाटी से एकजुटता की कुछ ऐसी तस्वीरें सामने आईं जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान खींचा है। बडगाम और घाटी के अन्य हिस्सों में मुस्लिम समुदाय के लोग ईरान की मदद के लिए आगे आए हैं। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में छोटी बच्चियों को अपनी ‘गुल्लक’ (पिग्गी बैंक) दान करते और बुजुर्ग महिलाओं को अपने सोने के गहने व तांबे के बर्तन सौंपते देखा जा सकता है। ईरानी दूतावास ने कश्मीर की एक ऐसी महिला के त्याग का विशेष उल्लेख किया, जिसने अपने पति की मृत्यु के 28 साल बाद उनकी याद में संभाल कर रखा सोना ईरान की मदद के लिए दान कर दिया। दूतावास ने कहा कि आपकी सच्ची भावनाएं ईरान के लोगों के लिए इस कठिन समय में सबसे बड़ा सहारा हैं।

ग्राउंड जीरो से आ रही रिपोर्टों के अनुसार, बडगाम की ‘मस्जिद इमाम ज़मान’ में दान इकट्ठा करने के लिए विशेष स्टॉल लगाए गए हैं। स्थानीय निवासी मोहसिन अली ने न्यूज़ एजेंसी एएनआई को बताया कि चूंकि वे भौतिक रूप से ईरान जाकर युद्ध में सहायता नहीं कर सकते, इसलिए आर्थिक मदद के जरिए मानवता की सेवा करने की कोशिश कर रहे हैं। लोग अपनी सामर्थ्य के अनुसार नकद, चांदी और तांबे के बर्तन दान कर रहे हैं ताकि युद्ध से प्रभावित ईरानी नागरिकों को फिर से खड़ा होने में मदद मिल सके।

इस मानवीय सहायता के बीच कूटनीतिक स्तर पर भी दोनों देशों के रिश्तों में प्रगाढ़ता देखी जा रही है। मुंबई में ईरान के महावाणिज्य दूत सईद रजा मोसायब मोतलघ ने हाल ही में भारत की दोस्ती की सराहना करते हुए कहा कि ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ के माध्यम से भारतीय जहाजों को सुरक्षित रास्ता देने का तेहरान का फैसला इसी लंबे जुड़ाव का परिणाम है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान भारत में गैस की कमी की स्थिति को लेकर चिंतित था, इसलिए संघर्ष के बावजूद भारतीय हितों का ध्यान रखा गया। भारत से मिल रहे इस जन-समर्थन ने युद्ध के बीच दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और मानवीय सेतु को और मजबूत कर दिया है।

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