Middle East Conflict: मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध और ईरान के साथ बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजारों में मची उथल-पुथल के बीच अमेरिका ने एक बड़ा रणनीतिक कदम उठाया है। ट्रंप प्रशासन ने अन्य देशों को रूस से कच्चा तेल खरीदने के लिए अस्थायी अनुमति देने की घोषणा की है। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने स्पष्ट किया है कि यह फैसला अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों को नियंत्रित करने और ऊर्जा आपूर्ति में स्थिरता लाने के उद्देश्य से लिया गया है।
ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप वैश्विक ऊर्जा बाजार में कीमतों को कम रखने के लिए निर्णायक कदम उठा रहे हैं। उन्होंने बताया कि यह छूट विशेष रूप से उस रूसी तेल के लिए दी गई है जो वर्तमान में जहाजों पर लदा हुआ है और समुद्र में फंसा हुआ है। इस ‘अल्पकालिक उपाय’ का उद्देश्य वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को सुचारू बनाना है ताकि युद्ध के कारण तेल की कमी और कीमतों में बेतहाशा वृद्धि को रोका जा सके। अमेरिका ने पहले ही भारत जैसे देशों को रूस से तेल आयात के मामले में इसी तरह के लचीले रुख का संकेत दिया था।
अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि इस कदम से रूसी सरकार को कोई बड़ा वित्तीय लाभ नहीं होगा, क्योंकि रूस को अपने ऊर्जा राजस्व का मुख्य हिस्सा तेल उत्पादन के स्तर पर लगाए गए करों से मिलता है, न कि समुद्र में पहले से मौजूद स्टॉक की बिक्री से। बेसेंट ने ट्रंप की ऊर्जा नीतियों की सराहना करते हुए कहा कि अमेरिका में तेल और गैस का उत्पादन रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गया है, जिससे घरेलू स्तर पर ईंधन की कीमतें कम रखने में मदद मिली है।
सरकार के अनुसार, वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में वर्तमान वृद्धि एक क्षणिक बाधा है। अमेरिका का तर्क है कि इस तरह के अस्थायी प्राधिकरण से न केवल अंतरराष्ट्रीय बाजार को राहत मिलेगी, बल्कि दीर्घकालिक रूप से अमेरिकी अर्थव्यवस्था और राष्ट्र को भी लाभ होगा। मिडिल ईस्ट के संकट के बीच अमेरिका की यह घोषणा वैश्विक ऊर्जा कूटनीति में एक बड़े बदलाव का संकेत मानी जा रही है।
